लुधियाना: लुधियाना में ट्रैफिक पुलिस ने वाहनों की नंबर प्लेट को लेकर एक बेहद सख्त और विशेष चेकिंग अभियान छेड़ दिया है। शहर के 20 से अधिक प्रमुख स्थानों और चौराहों पर खास नाकाबंदी कर पुलिस उन वाहन चालकों पर शिकंजा कस रही है, जिनकी गाड़ियों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी है। इसी चेकिंग के दौरान समराला चौक पर तब भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब चंडीगढ़ से आए एक युवक की कार को पुलिस ने रोक लिया। इस कार पर परमानेंट नंबर की बजाय ‘अप्लाई फॉर नंबर’ (Apply For Number) की पर्ची लगी हुई थी, जिसे लेकर पुलिस और युवक के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
‘अप्लाई फॉर नंबर’ का दिया तर्क, फिर भी पुलिस ने काटा चालान
जानकारी के मुताबिक, चंडीगढ़ का रहने वाला अविक वर्मा नाम का युवक लुधियाना में अपने किसी रिश्तेदार से मिलने आया था। समराला चौक पर जब एसीपी जतिन बांसल की अगुवाई में पुलिस टीम ने उसे रोका, तो कार पर लगी टेंपरेरी प्लेट को देखकर विवाद शुरू हो गया। युवक ने पुलिस कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताते हुए तर्क दिया कि उसकी गाड़ी पर चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी ‘अप्लाई फॉर नंबर’ लगा है, जो 180 दिनों तक पूरी तरह वैध होता है। युवक का कहना था कि वह हरियाणा सरकार से फैंसी नंबर लेने का इंतजार कर रहा है और उसके सभी दस्तावेजों में भी यही दर्ज है। हालांकि, पुलिस ने उसके सभी तर्कों को दरकिनार करते हुए सीधा चालान काट दिया, जिससे बीच सड़क पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।
एसीपी की दो टूक- पंजाब की सड़कों पर मानने होंगे नियम
इस पूरे विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए एसीपी जतिन बांसल ने दो टूक शब्दों में कहा कि बिना परमानेंट नंबर प्लेट या केवल ‘अप्लाई फॉर नंबर’ लिखी हुई कोई भी गाड़ी मान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मनचाहा या फैंसी नंबर अभी तक जारी न होने का तर्क कोई ठोस कारण नहीं माना जा सकता है। पुलिस अधिकारी ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि यदि कोई भी व्यक्ति पंजाब की सड़कों पर अपना वाहन दौड़ा रहा है, तो उसे अनिवार्य रूप से यहां के ट्रैफिक नियमों का पालन करना ही होगा, फिर चाहे उसे नंबर किसी अन्य राज्य से ही क्यों न लेना हो।
बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों से बढ़ता है अपराध का खतरा
पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के पीछे का मुख्य कारण सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करना है। एसीपी जतिन बांसल ने बताया कि बिना नंबर प्लेट के या टेंपरेरी नंबर के साथ वाहन चलाना सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बेहद गंभीर मामला है। ऐसे वाहनों का इस्तेमाल अक्सर आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है और यदि कोई वारदात हो जाती है, तो बिना नंबर की गाड़ियों को ट्रेस करने में पुलिस को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई मामलों में जांच के दौरान जाली या गलत नंबर प्लेट भी एक बड़ी बाधा बनकर सामने आती हैं, इसलिए यह सख्ती बरती जा रही है।

Displaying an ‘Apply For Number’ slip proves costly: Chandigarh youth gets into a heated altercation








