
लुधियाना: लुधियाना के सिविल अस्पताल में लगभग सवा साल पहले एक मरीज की मौत के बाद उसका शव घंटों तक एक जिंदा मरीज के साथ बेड पर पड़े रहने के गंभीर मामले में पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्वास्थ्य निदेशक (डायरेक्टर हेल्थ) को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर कोई जिम्मेदार अधिकारी पेश हो और यह स्पष्ट करे कि इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
यह आदेश तब जारी किया गया जब विभाग द्वारा सुनवाई के लिए भेजे गए एक सीनियर असिस्टेंट आयोग के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने विभाग से डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा था। जवाब देने के लिए विभाग ने स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय की ई-2 ब्रांच में तैनात एक सीनियर असिस्टेंट को भेज दिया। आयोग के अनुसार, भेजा गया कर्मचारी यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई भी है या नहीं, जिससे आयोग ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
यह मामला लुधियाना के एक सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद शर्मा द्वारा दायर की गई शिकायत पर आधारित है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा था। उस समय लुधियाना के तत्कालीन सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में माना था कि तत्कालीन एसएमओ (SMO) को प्रबंधकीय लापरवाही के लिए और एक ईएमओ (EMO) को भी घटना के लिए जिम्मेदार पाया गया था। रिपोर्ट में इन दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए निदेशक, स्वास्थ्य विभाग को सिफारिश भेजने की बात कही गई थी।
आयोग ने इस जवाब को अधूरा मानते हुए खारिज कर दिया था, क्योंकि इसमें यह कहीं नहीं बताया गया था कि सिफारिश के बाद असल में दोनों अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई। इसी अधूरे जवाब पर स्पष्टीकरण के लिए विभाग को तलब किया गया था, लेकिन विभाग ने फिर एक गैर-जिम्मेदार अधिकारी को भेजकर मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अब आयोग ने साफ कर दिया है कि अगली पेशी पर पूरी जानकारी के साथ एक वरिष्ठ और जिम्मेदार अधिकारी को ही पेश होना होगा।
View this post on Instagram

dead body was lying on the bed with a live patient




