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H-1B वीजा पर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, लाखों भारतीय पेशेवरों की हुई बल्ले-बल्ले; डोनाल्ड ट्रंप को लगा बड़ा झटका

वाशिंगटन: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों और दिग्गज आईटी कंपनियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी (H-1B) वीजा नीति को संघीय अदालत में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। एक अमेरिकी संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (यानी करीब 83 लाख रुपये) के भारी-भरकम अतिरिक्त शुल्क को पूरी तरह से गैरकानूनी करार देते हुए उसे अमान्य घोषित कर दिया है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि यह मनमाना शुल्क अमेरिकी कानून के प्रावधानों के सख्त खिलाफ है।

अदालत ने फैसले में क्या दी अहम दलील?

इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए अमेरिकी न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपने अहम फैसले में स्थिति को स्पष्ट किया। जज ने कहा कि संघीय सरकार के पास वीजा आवेदनों पर इस तरह का कोई भी अतिरिक्त शुल्क थोपने का स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं था। अदालत ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को कानून की तय सीमाओं से पूरी तरह बाहर माना और तत्काल प्रभाव से इस 83 लाख रुपये की भारी फीस को निरस्त करने का सख्त आदेश जारी कर दिया है।

भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को मिली बड़ी संजीवनी

अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला भारतीय पेशेवरों के लिए किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है। गौरतलब है कि अमेरिका की बड़ी कंपनियों में काम करने वाले ज्यादातर विदेशी पेशेवरों में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ ही शामिल होते हैं, जो मुख्य रूप से इसी H-1B वीजा के जरिए वहां अपनी सेवाएं देते हैं। इस अतिरिक्त और भारी फीस के रद्द होने से न सिर्फ इन भारतीय पेशेवरों को बल्कि इन्हें नौकरी पर रखने वाली अमेरिकी कंपनियों को भी आर्थिक मोर्चे पर बहुत बड़ी राहत मिली है।

Court delivers major verdict on H-1B visas; hundreds of thousands of Indian professionals rejoice