
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बीच जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उससे कहीं ‘महायुद्ध’ छिड़ने की आशंका गहराने लगी है। इस बेहद संवेदनशील समय में, केंद्र सरकार ने सभी मीडिया चैनलों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि रक्षा ऑपरेशनों और सेना की हलचल से जुड़ी खबरों की कवरेज करते समय अत्यधिक संयम बरता जाए। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, मीडिया से ऐसी किसी भी जानकारी को प्रसारित न करने की अपील की गई है जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी इस एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसे ध्यान में रखते हुए मीडिया संस्थानों को सूत्रों पर आधारित समाचार, रक्षा ऑपरेशनों की रियल टाइम कवरेज या सेना के मूवमेंट को दिखाने से बचना चाहिए।
सरकार ने अपने परामर्श में कारगिल युद्ध, मुंबई आतंकवादी हमले और कंधार विमान अपहरण कांड जैसे अतीत के अनुभवों का भी उल्लेख किया है, जहां मीडिया कवरेज के तरीके से राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ने की बातें सामने आई थीं। एडवाइजरी में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि मीडिया की नैतिक जिम्मेदारी भी है।
परामर्श में यह भी बताया गया है कि आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों का सीधा (लाइव) प्रसारण करना केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों का उल्लंघन है। सरकार ने सलाह दी है कि ऐसे ऑपरेशनों के संबंध में सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा दी जाने वाली नियमित ब्रीफिंग को ही मीडिया कवरेज का आधार बनाया जाना चाहिए।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पहलगाम हमले के बाद से ही सीमा पर तनाव बढ़ा हुआ है और सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ सघन अभियान चला रहे हैं। संवेदनशील जानकारी के संभावित लीक या दुश्मन द्वारा उसका फायदा उठाने से रोकने के उद्देश्य से यह एडवाइजरी जारी की गई है।
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Central government issues advisory to media channels




