नवांशहर: पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) जिले के गांव उरापड़ के रहने वाले गुरचरण सिंह की किस्मत ने ऐसा चमत्कार किया है कि हर कोई हैरान है। पिछले चार दशकों से लगातार लॉटरी का टिकट खरीद रहे गुरचरण सिंह आखिरकार रातों-रात करोड़पति बन गए हैं। उन्होंने मंथली ड्रा में डेढ़ करोड़ रुपये (1.50 करोड़) का पहला भारी-भरकम इनाम जीता है। इस छप्परफाड़ जीत के बाद गुरचरण के परिवार में जश्न का माहौल है और उन्हें बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है।
बेटे के नाम पर खरीदी थी लॉटरी की टिकट
इस जीत की सबसे दिलचस्प बात यह है कि 40 साल के लंबे इंतजार के बाद गुरचरण सिंह ने यह चमत्कारी टिकट अपने बेटे मान सिंह के नाम पर खरीदा था। बीते 4 अप्रैल 2026 को निकले इस बंपर ड्रा के नतीजे आने के बाद मंगलवार को यह भाग्यशाली परिवार आधिकारिक रूप से लुधियाना स्थित भनोट एंटरप्राइजेज के दफ्तर पहुंचा। यहां गुरचरण सिंह ने परिवार के साथ अपनी जीत का दावा पेश किया और इनाम पाने के लिए सभी जरूरी दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी कीं।
दिन में पेंटिंग और रात में बजाते हैं तबला
करोड़पति बने गुरचरण सिंह पेशे से एक बेहतरीन पेंटिंग आर्टिस्ट हैं। रंगों से खूबसूरत तस्वीरें उकेरने के साथ-साथ उनका भगवान से भी गहरा आध्यात्मिक लगाव है। वह पिछले कई वर्षों से भगवती जागरणों में पूरी श्रद्धा के साथ तबला बजाते आ रहे हैं। अपनी इस शानदार जीत पर खुशी जताते हुए गुरचरण ने बताया कि उन्हें अपनी किस्मत और भगवान की कृपा पर पूरा भरोसा था। उन्होंने 40 साल तक कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और आज उनके बेटे के नाम पर लगी इस लॉटरी ने उनके लंबे इंतजार को एक बेहद सुखद अंजाम तक पहुंचा दिया है।
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर खर्च होगी करोड़ों की रकम
गुरचरण सिंह ने बताया कि उन्होंने यह लॉटरी टिकट अपने घर के बिल्कुल पास मौजूद रोहणी लॉटरी से ही खरीदा था। उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। इतनी बड़ी रकम जीतने के बाद भी गुरचरण बिल्कुल सादगी से कहते हैं कि वह इस इनामी राशि का इस्तेमाल अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने और अपने पुश्तैनी काम को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए करेंगे। वहीं, विजेताओं का जोरदार स्वागत करते हुए भनोट एंटरप्राइजेज के संचालक श्याम सुंदर भनोट ने खुशी जताते हुए बताया कि उनके माध्यम से बिकने वाली टिकटों में यह 171वां करोड़पति है, जबकि नए साल 2026 के महज इन चार महीनों में ही यह पांचवां बड़ा विजेता है।

A Painter from Punjab Strikes It Rich: A Ticket Purchased in His Son’s Name Turns Him








