जालंधर: जालंधर की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अथर सईद को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दोषी करार देते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 22 दिसंबर को जारी इस आदेश में कोर्ट ने आरोपी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है, तो उसे तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने सबूत के तौर पर बरामद किए गए 17 लाख रुपए को भी जब्त करने के निर्देश दिए हैं। ईडी की जांच के मुताबिक, यह पूरा मामला सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित अवैध काली कमाई को सफेद करने से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष यह साबित किया कि अथर सईद न केवल तस्करी से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा था, बल्कि वह अवैध रूप से जुटाए गए धन को छिपाने और उसे वैध (व्हाइट मनी) दिखाने की गतिविधियों में भी संलिप्त था।
सुनवाई के दौरान ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपी के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और नकदी की आवाजाही का गहरा विश्लेषण कर ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने जोरदार दलील दी कि आरोपी की गतिविधियां कानून के खिलाफ होने के साथ-साथ समाज और युवाओं पर भी बुरा असर डाल रही थीं। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि किस तरह नशा तस्करी के पैसों का स्रोत छुपाकर उसे सिस्टम में खपाने की कोशिश की गई थी।
अदालत ने सभी गवाहों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए गंभीर खतरा माना। कोर्ट ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि मादक पदार्थों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों के प्रति नरमी नहीं बरती जा सकती। समाज में कड़ा संदेश देने और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से ही दोषी को यह सख्त सजा सुनाई गई है।

A Jalandhar court sentenced a drug trafficker to three years of rigorous imprisonment and ordered the seizure of Rs. 17 lakh.




