जालंधर: जालंधर शहर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी किल्लत ने आम जनता और व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। आपूर्ति में आई भारी गिरावट के कारण गैस एजेंसियों ने बुकिंग नियमों को कड़ा कर दिया है, जिससे उपभोक्ताओं में डर और भ्रम का माहौल है। जहां एक ओर घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने शहर के व्यापारिक चक्के की रफ्तार धीमी कर दी है।
बुकिंग के नए नियमों ने बढ़ाई जनता की मुश्किलें
शहर के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा झटका बुकिंग नियमों में हुआ बदलाव है। पहले जहां 15 दिनों के अंतराल पर सिलेंडर बुक किया जा सकता था, वहीं अब नई व्यवस्था के तहत एक सिलेंडर मिलने के पूरे 30 दिन बाद ही उपभोक्ता दूसरे सिलेंडर के लिए बुकिंग करवा पाएंगे। जालंधर के कीर्ति नगर स्थित एचपी गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनके हाथ केवल निराशा लग रही है। कई ग्राहकों ने शिकायत की है कि बुकिंग के लिए मोबाइल पर ओटीपी (OTP) ही नहीं आ रहा, जिससे डिजिटल बुकिंग पूरी तरह ठप पड़ी है।
ढाबा संचालकों की मजबूरी और आसमान छूते दाम
कमर्शियल गैस की सप्लाई लगभग बंद होने के कगार पर पहुंच गई है, जिसका सीधा असर छोटे व्यापारियों और ढाबा संचालकों पर पड़ा है। आपूर्ति बाधित होने का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले लोग सक्रिय हो गए हैं। ढाबा संचालकों का कहना है कि उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए ब्लैक में अत्यधिक दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। जो कमर्शियल सिलेंडर पहले करीब 1900 रुपये में उपलब्ध था, वह अब ब्लैक मार्केट में 3500 रुपये तक की भारी-भरकम कीमत पर बेचा जा रहा है।
व्यापार और रसोई पर दोहरी मार
गैस संकट की यह स्थिति केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शहर की खाद्य व्यवस्था और आम आदमी की रसोई का बजट भी बिगड़ गया है। छोटे ढाबा चलाने वाले व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो उन्हें अपने संस्थान बंद करने पड़ेंगे क्योंकि इतनी महंगी गैस खरीदकर खाना परोसना अब उनके वश से बाहर होता जा रहा है। गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस दिशा में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि कालाबाजारी पर लगाम लग सके और सप्लाई चेन सुचारू हो सके।

A gas crisis has caused widespread outrage in Jalandhar, with domestic cylinders now available








