
चंडीगढ़: हरियाणा में चुनावी रुझानों में बीजेपी की बढ़त ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर जब एग्जिट पोल्स में पार्टी को कमजोर स्थिति में दिखाया गया था। अभी चुनावी नतीजे अंतिम नहीं आए हैं, लेकिन बीजेपी के अचानक मजबूत प्रदर्शन ने चर्चा का विषय बना दिया है। तीन प्रमुख फैक्टर जो बीजेपी की सफलता में योगदान देते नजर आ रहे हैं:
1. कुमारी शैलजा का दलित कार्ड
बीजेपी ने कुमारी शैलजा का मुद्दा जोर-शोर से उठाया, जिसमें बताया गया कि उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं दिया गया। इस स्थिति का इस्तेमाल कर बीजेपी ने संदेश दिया कि कांग्रेस दलित नेताओं का सम्मान नहीं करती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर इशारे किए। अगर बीजेपी इस चुनाव में सफल होती है, तो यह माना जाएगा कि उसने दलित वोटरों को अपने पक्ष में लाने में कामयाबी पाई है।
2. खर्ची और पर्ची का आरोप
बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के कार्यकाल में नौकरियों में पैसे और सिफारिश के कथित प्रचलन को मुद्दा बनाया। पार्टी का दावा है कि उनके शासन में सभी वर्गों को बिना भेदभाव नौकरी मिली। यदि बीजेपी चुनाव जीतती है, तो यह नरेटिव भी महत्वपूर्ण साबित होगा।
3. मुख्यमंत्री का बदलना
मनोहरलाल खट्टर को लगभग 10 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद हटाया गया, जिसके पीछे बीजेपी का एंटी इनकम्बेंसी खत्म करने का प्रयास माना जा रहा है। उनकी जगह ओबीसी नेता नायब सिंह सैनी को तवज्जो दी गई, जिससे बीजेपी ने जाट और नॉन-जाट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। यदि बीजेपी सरकार बनाने में सफल होती है, तो यह रणनीति भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर साबित होगी।
इन फैक्टरों के माध्यम से बीजेपी ने हरियाणा में अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की है, और अगर रुझान बरकरार रहते हैं, तो पार्टी की जीत की संभावना बढ़ जाएगी।
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