You are currently viewing पंजाब में चुनावी शंखनाद की तैयारी: दिवाली के बाद बठिंडा में महारैली कर सकते हैं PM मोदी, गठबंधन पर हो सकता है ऐलान

पंजाब में चुनावी शंखनाद की तैयारी: दिवाली के बाद बठिंडा में महारैली कर सकते हैं PM मोदी, गठबंधन पर हो सकता है ऐलान

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में अपनी सियासी गतिविधियां तेज करने की व्यापक रणनीति तैयार की है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली के बाद मालवा के सियासी गढ़ बठिंडा का दौरा कर सकते हैं। पंजाब भाजपा ने प्रधानमंत्री के दौरे और एक विशाल जनसभा को संबोधित करने के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से समय मांगा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 15 से 20 नवंबर के बीच रैली की अंतिम तारीख तय होने की प्रबल संभावना है।

बठिंडा से चुनावी अभियान का आगाज, सीमावर्ती राज्य को मिल सकती है बड़ी सौगात
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, बठिंडा की इस प्रस्तावित महारैली के माध्यम से भाजपा पंजाब में अपने औपचारिक चुनावी अभियान का बिगुल फूंक सकती है। इसके साथ ही, सीमावर्ती राज्य पंजाब के आर्थिक और ढांचागत विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा किसी बड़ी परियोजना या विशेष पैकेज की घोषणा किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालवा क्षेत्र में बादल परिवार के पारंपरिक सियासी प्रभाव को देखते हुए बठिंडा में प्रधानमंत्री की यह रैली पंजाब के सियासी समीकरणों को सीधा प्रभावित करेगी।

‘पुनर सुरजीत’ धड़े के साथ गठबंधन लगभग तय, नई दिल्ली से हो सकती है घोषणा
राज्य में नए सियासी गठजोड़ की दिशा में भी अहम प्रगति देखने को मिल रही है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के बीच गठबंधन की बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व वाला यह अकाली धड़ा अगस्त 2025 में सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल से अलग हुआ था। बताया जा रहा है कि ‘पुनर सुरजीत’ ने पंजाब और पंजाबियों के प्रमुख मुद्दों पर आधारित एक ब्लूप्रिंट पहले ही भाजपा नेतृत्व को सौंप दिया है, और इस नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा नई दिल्ली में जल्द की जा सकती है।

बादल गुट से भी तालमेल की अटकलें, नफा-नुकसान का आकलन कर रही भाजपा
एक तरफ जहां पुनर सुरजीत गुट के साथ समझौते की रूपरेखा तैयार हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले मुख्य शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ भी दोबारा हाथ मिलाने की सियासी अटकलें जोरों पर हैं। वर्ष 2020 में कृषि सुधार कानूनों के विरोध में दोनों दलों का दशकों पुराना गठबंधन टूट गया था। आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व दोनों दलों के फिर से एक मंच पर आने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सीटों के बंटवारे और चुनावी नफा-नुकसान का बारीक आकलन कर रहा है, जिसमें भाजपा इस बार राज्य में पहले के मुकाबले कहीं अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक दिखाई दे रही है।

Gearing up for the election campaign in Punjab: PM Modi may hold a mega-rally in Bathinda