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कनाडा में रातों-रात टूटे हजारों भारतीयों के सपने, 6 महीने में हजारों लोगों को किया गया डिपोर्ट; आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन

ओटावा: कनाडा जाकर बेहतर भविष्य की तलाश करने वाले भारतीयों के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। ट्रूडो सरकार ने अपने इमिग्रेशन नियमों पर ऐसी सख्ती कर दी है कि हजारों भारतीयों के विदेश में बसने के सपने रातों-रात टूट गए हैं। इस साल के शुरुआती छह महीनों में ही कनाडा ने रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई करते हुए 3,300 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट कर वापस भारत भेज दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद भारतीय नागरिक कनाडा से डिपोर्ट होने वाले विदेशियों की सूची में पहले नंबर पर आ गए हैं, जिसने भारत-कनाडा के रिश्तों में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन, मेक्सिको को भी छोड़ा पीछे

कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के जनवरी से जून के बीच 3,323 भारतीयों को देश से निकाला गया है। यह आंकड़ा इसलिए भी डराने वाला है क्योंकि पिछले पूरे साल (2025) में कुल 3,779 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया था। इस साल सिर्फ छह महीने में ही डिपोर्टेशन का यह आंकड़ा पिछले साल के लगभग 88 फीसदी तक पहुंच गया है। इस सूची में भारतीयों के बाद दूसरे नंबर पर मेक्सिको के नागरिक हैं, जिनके 1,573 लोगों को निकाला गया है। अगर पिछले सालों पर नजर डालें तो 2024 में 2,004 भारतीयों को वापस भेजा गया था। कुल मिलाकर, इस साल की पहली छमाही में कनाडा ने 10,607 विदेशियों को डिपोर्ट किया है, जबकि पिछले पूरे साल यह संख्या 23,160 थी।

क्या है डिपोर्टेशन की मुख्य वजह?

हालांकि, डिपोर्ट किए गए इन सभी भारतीयों को किसी आपराधिक मामले की वजह से नहीं निकाला गया है। सीबीएसए के मुताबिक, कनाडा के सख्त इमिग्रेशन कानूनों और वीजा शर्तों का उल्लंघन करने के कारण उन पर यह गाज गिरी है। इस साल डिपोर्ट किए गए कुल 10,607 लोगों में से 8,551 ऐसे रिफ्यूजी (शरणार्थी) दावेदार थे, जिनके दावों को खारिज कर दिया गया था और जो नियमों का पालन करने में विफल रहे थे। वहीं, 1,303 मामले ऐसे थे जिन्होंने शरणार्थी का दावा तो नहीं किया था, लेकिन वे भी नियमों की अनदेखी के दोषी पाए गए। कनाडा की इमिग्रेशन एजेंसी स्वैच्छिक रूप से देश छोड़ने वालों और जबरन डिपोर्ट किए जाने वालों का अलग-अलग रिकॉर्ड रखती है।

भारत-कनाडा रिश्तों पर पड़ सकता है असर

कनाडा में अचानक तेज हुए इस डिपोर्टेशन अभियान ने नई दिल्ली की भी चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई कूटनीतिक मुद्दों पर तनाव रहा है, हालांकि हाल ही में संबंधों को सुधारने की कोशिशें की जा रही थीं। कनाडा में भारतीय छात्रों, कामगारों और प्रवासियों की एक बहुत बड़ी आबादी रहती है। डिपोर्टेशन लिस्ट में भारतीयों का दूसरे स्थान से सीधे पहले स्थान पर पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि कनाडा में इमिग्रेशन नियमों को लेकर जबरदस्त सख्ती बरती जा रही है। भले ही सीबीएसए के आंकड़े यह नहीं बताते कि यह कार्रवाई किसी खास ‘इंडिया-स्पेसिफिक’ नीति का हिस्सा है, लेकिन इन बढ़ते आंकड़ों ने विदेशी धरती पर भारतीयों के साथ व्यवहार को एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Dreams of thousands of Indians in Canada shattered overnight