चंडीगढ़: पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून का दूसरा दौर बेहद आक्रामक रूप लेने जा रहा है। मौसम में अचानक आ रहे इस बड़े बदलाव ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र ने ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए 27 से 29 जुलाई के बीच पूरे क्षेत्र में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है और मौसम की गंभीरता को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है, जिससे निचले इलाकों और प्रमुख शहरों में जलभराव तथा बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
अमृतसर में टूटा 15 साल का रिकॉर्ड, कई जिलों में झमाझम बारिश
मानसून की सक्रियता का असर राज्य में पहले से ही दिखाई देने लगा है और पिछले 24 घंटों के दौरान पंजाब के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। गुरु की नगरी अमृतसर में जुलाई महीने की बारिश ने पिछले 15 सालों का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जहां बीते 24 घंटे में ही सबसे अधिक 100 मिलीमीटर (मिमी) बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा फाजिल्का के अबोहर में 33 मिमी, गुरदासपुर में 33.5 मिमी, पठानकोट के केवीके में 18 मिमी, होशियारपुर के सालेरन में 17 मिमी और फरीदकोट में 16 मिमी वर्षा हुई है। राजधानी चंडीगढ़ में भी 2.7 मिमी बारिश हुई, जिससे यहां का अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
ग्रामीणों ने सड़क पर किया धान की रोपाई का प्रदर्शन
एक तरफ जहां भारी बारिश से मौसम सुहावना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इसने प्रशासनिक दावों और सड़कों की बदहाल स्थिति की पोल खोलकर रख दी है। जालंधर-लुधियाना नेशनल हाईवे पर गोराया के पास स्थित गांव संग ढेसियां में सड़क की जर्जर हालत और जलभराव से आक्रोशित ग्रामीणों और दुकानदारों ने प्रशासन के खिलाफ एक बेहद अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और उनमें भरे गंदे पानी के बीच धान की रोपाई (धान रोपा) कर प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया, जो अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
अधिकारियों की अनदेखी से रोजाना जान जोखिम में डाल रहे राहगीर
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय ग्रामीण बूटा सिंह और भोगल ने बताया कि संग ढेसियां को जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क पिछले लंबे समय से पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बारिश के मौसम में सड़क पर बने दो से तीन फुट गहरे गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं, जिससे हर समय किसी बड़े सड़क हादसे का खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का पुनर्निर्माण नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में हाईवे जाम कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।


Orange alert for torrential rain in Punjab; 15-year record broken; villagers plant paddy on dilapidated roads








