चंडीगढ़: पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय संकट से जूझ रहा है। अपनी चरमराती माली हालत को संभालने के लिए पावरकॉम ने बिना पंजाब सरकार की गारंटी के बाजार से करीब 10,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है। पंजाब के इतिहास में यह पहला मौका है जब बिजली कंपनी सरकारी गारंटी के बिना इतनी बड़ी रकम उधार लेने जा रही है। इस चौंकाने वाले कदम के बाद ऊर्जा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या कंपनी को अब अपनी सरकारी संपत्तियां गिरवी रखनी पड़ेंगी।
बॉन्ड और डिबेंचर के जरिए जुटाया जाएगा भारी-भरकम फंड
10 हजार करोड़ रुपये का यह विशाल फंड जुटाने के लिए पावरकॉम बाजार में नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) और बॉन्ड जारी करने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने और ट्रांजेक्शन एडवाइजर के चयन के लिए सेबी से पंजीकृत कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन निविदाएं मंगवाई गई हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि पावरकॉम ने हाल ही में पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास अपनी ‘वार्षिक राजस्व आवश्यकता’ का नया प्रस्ताव भी जमा कराया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनी अपनी खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को उबारने के लिए नए रास्ते तलाश रही है।
सरकार पर बकाया हैं 9,600 करोड़ रुपये, बढ़ा वित्तीय दबाव
पावरकॉम के इस तरह बिना गारंटी कर्ज लेने के पीछे पंजाब सरकार का ढुलमुल रवैया बड़ी वजह माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार पर पिछले और मौजूदा वित्तीय वर्ष की करीब 7,000 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी का भुगतान बकाया है। इसके साथ ही, सरकारी विभागों ने भी लगभग 2,600 करोड़ रुपये के बिजली बिल नहीं चुकाए हैं। यानी कुल मिलाकर सरकार पर ही 9,600 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा गर्मियों के पीक सीजन में निर्बाध आपूर्ति के लिए पावरकॉम को बेहद महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी, जिससे कंपनी पर वित्तीय बोझ कई गुना बढ़ गया।
विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, गिरवी रखनी पड़ सकती हैं संपत्तियां
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों ने पावरकॉम के इस कदम पर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब सरकार गारंटी देने से पीछे हट जाती है, तो किसी भी कंपनी को बाजार से कर्ज उठाने के लिए अपनी कीमती परिसंपत्तियां गिरवी रखनी पड़ती हैं। इसके अलावा बिना सरकारी बैकअप के कर्ज लेने पर मर्चेंट बैंकरों को भारी-भरकम कमीशन भी चुकाना पड़ता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर पंजाब सरकार 10,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड की गारंटी तक देने को तैयार नहीं है, तो पावरकॉम अकेला इतनी बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी उठाने का जोखिम क्यों ले रहा है।


Power crisis looms in Punjab; Powercom set to raise a ₹10,000 crore loan without government guarantee








