लुधियाना: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) को लेकर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा और बेहद हैरान कर देने वाला मामला पंजाब के लुधियाना से सामने आया है, जहां एक छात्रा की खुशी कुछ ही घंटों में गहरे सदमे में बदल गई। जिस होनहार बेटी ने 720 में से 715 अंक और ‘ऑल इंडिया रैंक-1’ हासिल करने की खुशी में पूरे गांव में मिठाइयां बांटी थीं, अचानक वेबसाइट से उसका पूरा रिजल्ट ही गायब हो गया। अब यह परिवार इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है और एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्क्रीन पर दिखे 715 अंक, फिर जो हुआ उसने उड़ा दिए होश
समराला क्षेत्र के गांव नड़ेले (सिहाला) की रहने वाली सिमरन रानी ने दावा किया है कि जब री-नीट यूजी (Re-NEET UG) परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो उसने आधिकारिक वेबसाइट पर अपना रिजल्ट चेक किया। सिमरन के मुताबिक, स्क्रीन पर साफ तौर पर उसके 720 में से 715 अंक और ऑल इंडिया रैंक-1 दर्ज थी। इस शानदार कामयाबी को देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और तुरंत घर के साथ-साथ पूरे गांव में मिठाइयां बांट दी गईं। यहां तक कि गांव के सरपंच ने भी घर आकर इस होनहार छात्रा को सम्मानित किया। लेकिन कुछ समय बाद जब परिवार ने दोबारा अपना रिजल्ट चेक किया, तो अंक तो वही थे, लेकिन मेरिट लिस्ट से सिमरन का नाम पूरी तरह नदारद था। जब उन्होंने तीसरी बार लॉग-इन किया, तो वेबसाइट से उसका पूरा रिजल्ट ही गायब हो चुका था और इसके बाद लाख कोशिशों के बावजूद रिजल्ट स्क्रीन पर नहीं दिखा।
12-13 घंटे की कड़ी मेहनत, अब ओएमआर शीट सार्वजनिक करने की मांग
सिमरन एक बेहद साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पिता हरदीप कुमार और दादा खेती-बाड़ी कर घर चलाते हैं। परिवार का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी बेटी ने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए रोजाना 12 से 13 घंटे तक कड़ी मेहनत की थी। सिमरन की मां पूनम ने सिस्टम पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा है कि जब वेबसाइट पर उनकी बेटी के 715 अंक साफ-साफ दिखाई दे रहे थे, तो फिर मेरिट लिस्ट में उसका नाम क्यों नहीं शामिल किया गया? परिवार ने अब प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और सिमरन की ओएमआर (OMR) शीट तथा आंसर-की को सार्वजनिक रूप से दिखाया जाए ताकि असली सच सबके सामने आ सके।
दिल्ली बुलाई गई छात्रा, न्याय न मिलने पर खटखटाएंगे कोर्ट का दरवाजा
इस चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद गांव के सरपंच नीरज ने बताया कि छात्रा ने अपने 715 अंकों वाले रिजल्ट का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखा हुआ है, जो उनके दावे का सबसे बड़ा और पुख्ता सुबूत है। परिवार ने इस पूरी गड़बड़ी की शिकायत संबंधित आला अधिकारियों से कर दी है। जानकारी के मुताबिक, छात्रा को इस मामले की सुनवाई के लिए दिल्ली बुलाया गया है। सिमरन के परिजनों ने साफ कर दिया है कि अगर दिल्ली में उनकी सुनवाई नहीं होती है और उन्हें उचित समाधान नहीं मिलता, तो वे अपनी बेटी के हक के लिए सीधा अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल, इस पूरे विवाद को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तरफ से अब तक कोई भी आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।


‘AIR-1 appeared on the website, sweets were distributed… then the result suddenly vanished’








