चंडीगढ़: भारत और अमेरिका के बीच हो रहे नए व्यापार समझौते के खिलाफ देश का अन्नदाता एक बार फिर आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है। विदेशी उत्पादों की संभावित भरमार से कृषि और डेयरी सेक्टर को बचाने की हुंकार भरते हुए किसान संगठनों ने 21 जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक किसान घाट पर एक विशाल ‘महा रैली’ का बड़ा ऐलान किया है। इस आंदोलन को धार देने के लिए पंजाब में जमीनी स्तर पर तैयारियां बेहद तेज हो गई हैं। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के कद्दावर नेता सरवण सिंह पंधेर ने राज्य के किसानों, मजदूरों और खासकर युवाओं से इस मोर्चे में रिकॉर्ड संख्या में अपनी ताकत दिखाने की पुरजोर अपील की है। उनका दावा है कि इस महा रैली में पंजाब का दम दिखाने के लिए कोने-कोने से सैकड़ों बसों का काफिला दिल्ली के लिए कूच करेगा।
गांवों में बैठकों का दौर जारी, ब्यास और गोइंदवाल साहिब बने मुख्य केंद्र
इस महा रैली को एक ऐतिहासिक सफलता दिलाने के लिए किसान मजदूर मोर्चा, ए.के.एम. और बी.के.यू. एकता संघर्ष समेत कई बड़े किसान संगठन पूरी ताकत झोंक रहे हैं। राज्य के गांवों और कस्बों में लगातार बैठकें कर किसानों को लामबंद किया जा रहा है। आंदोलन को पूरी तरह से व्यवस्थित रखने के लिए सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि अलग-अलग जिलों में किसानों के जुटने के ठिकाने पहले ही तय कर लिए गए हैं। कल यानी 20 जुलाई की सुबह 11 बजे तक अमृतसर और गुरदासपुर के किसान ब्यास में भारी संख्या में एकत्र होंगे, जबकि तरनतारन के किसान गोइंदवाल साहिब में इकट्ठा होकर आगे का सफर तय करेंगे। इसके अलावा, पंजाब के बाकी सभी जिलों के लिए भी रवानगी के अलग-अलग स्थान तय किए गए हैं, जहां से एक साथ दिल्ली की ओर कूच किया जाएगा।
‘अमेरिकी उत्पाद भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग की तोड़ देंगे कमर’
इस कड़े विरोध की मुख्य वजह समझाते हुए किसान नेता पंधेर ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के स्थानीय कृषि और डेयरी सेक्टर के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है। उन्होंने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इस व्यापक व्यापार समझौते के आवरण में मक्का, सोयाबीन, कपास, ड्राई फ्रूट, सेब और नाशपाती जैसे कई अहम कृषि उत्पादों को शामिल करने की योजना है। पंधेर ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद बिना किसी ठोस सुरक्षा मानकों और प्रतिबंधों के सीधे भारतीय बाजारों में उतार दिए गए, तो हमारे स्थानीय किसानों और डेयरी उत्पादकों की कमर पूरी तरह टूट जाएगी और वे बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
कई राज्यों का मिलेगा साथ, सरकार से की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील
किसान संगठनों ने यह पूरी तरह से साफ कर दिया है कि यह आंदोलन केवल पंजाब की सीमाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है। 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में पंजाब के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा समेत देश के कई अन्य राज्यों से भी हजारों की संख्या में किसान और मजदूर अपना विरोध दर्ज कराने पहुंचेंगे। पंधेर ने प्रशासन को आश्वस्त किया है कि यह पूरी तरह से एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन होगा, जो 21 जुलाई की शाम 4 बजे विधिवत रूप से समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन से सख्त अपील की है कि उनके इस लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान किया जाए और किसानों को दिल्ली जाने से रोककर कोई तनाव का माहौल पैदा न किया जाए।


Major preparations underway for another march to Delhi; farmers’ mega-rally on July 21








