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पंजाब में बड़ा रेल चक्का जाम, बंदी सिखों की रिहाई के लिए पटरियों पर उतरा कौमी इंसाफ मोर्चा; अंबाला-लुधियाना रूट ठप

फतेहगढ़ साहिब: अपनी कानूनी सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा ने आज फतेहगढ़ साहिब में जोरदार ‘रेल रोको आंदोलन’ शुरू कर दिया है। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सुबह से ही कई सिख संगठनों के प्रतिनिधि और भारी संख्या में समर्थक गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में एकत्र हुए, जिसके बाद उन्होंने अंबाला-लुधियाना मुख्य रेलवे ट्रैक को पूरी तरह जाम कर दिया।

माधोपुर चौक तक मार्च और पटरियों पर धरना

गुरुद्वारा साहिब में एकत्र होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने माधोपुर चौक तक एक विशाल मार्च निकाला और फिर रेलवे पटरियों पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। मोर्चा की ओर से यह धरना सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक के लिए बुलाया गया है। रेलवे ट्रैक पर बड़ी संख्या में समर्थकों के डटे होने के कारण अंबाला और लुधियाना के बीच रेल यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और रेलवे सेवाओं पर असर

आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। रेलवे ट्रैक और उसके आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। वरिष्ठ अधिकारी लगातार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। पटरियों पर जारी इस धरने के कारण इस मुख्य मार्ग से गुजरने वाली कई ट्रेनों के संचालन पर सीधा असर पड़ा है।

मानवाधिकारों की दुहाई और ब्लैकलिस्ट से नाम हटाने की मांग

प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि अदालत द्वारा दी गई सजा पूरी करने के बावजूद बंदी सिखों को जेलों की सलाखों के पीछे रखना मानवाधिकारों और न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। इसके साथ ही मोर्चे ने एक और बड़ी मांग रखते हुए कहा कि ‘काली सूची’ में दर्ज करीब 20 हजार सिखों के नाम तुरंत बाहर किए जाने चाहिए। आंदोलनकारियों ने बलवंत सिंह राजोआणा, जगतार सिंह हवारा, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भियोरा और वर्तमान सांसद अमृतपाल सिंह समेत तमाम बंदी सिखों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग उठाई है।

Major rail blockade in Punjab; ‘Qaumi Insaaf Morcha’ takes to the tracks to demand the release of Sikh prisoners