Motera Ashram Case (PunjabLiveNews.iN): देश भर में मोटेरा आश्रम केस चर्चा का विषय बना हुआ हैं। गुजरात के अहमदाबाद के मोटेरा में स्थित संत श्री आशाराम जी बापू का आश्रम करोड़ों हिंदुओं और साधु संतों की आस्था का केंद्र हैं। लेकिन गुजरात सरकार इस आश्रम की भूमि को वापस लेकर वहाँ ओलंपिक-स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाना चाहती है। इस बात को लेकर देशभर के अखाड़ों के संत-महंत सामाजिक संगठन वकील और पत्रकार एकजुट होकर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

मोटेरा आश्रम तोड़ने के लिए क्या BJP बन गई भस्मासुर : अमन बग्गा( वरिष्ठ पत्रकार)
मोटेरा आश्रम केस मामले पर डिजिटल मीडिया एसोसिएशन के प्रधान वरिष्ठ पत्रकार अमन बग्गा ने बीजेपी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं उन्होंने कहा कि मोटेरा आश्रम को लेकर हो रही कार्रवाई ने सरकार के रवैये पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमन बग्गा ने कहा कि पहले तो नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत समेत बीजेपी के कई बड़े नेता हिंदू संत श्री आशाराम जी बापू के चरणों में झुक कर सत्ता पाने का आशीर्वाद लेते रहे और जब देश की सत्ता में बीजेपी काबिज हो गई तब उसी संत के लिए क्या बीजेपी भस्मासुर बन गई हैं?
क्या बीजेपी भूल गई कि इसी हिंदू संत ने पूरे देश भर में सनातन संस्कृति का शंखनाद कर हिंदुत्व का माहौल खड़ा किया, करोड़ों हिंदुओं के दिलों में हिंदूत्व की ज्वाला जगाई, गली गली गांव गांव जाकर राम मय हरि मय वातावरण बनाया, और फिर इसी हिंदुत्व का फायदा किस पार्टी मिला, उसी पार्टी को जिस ने हिदुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी शायद यह भूल गई कि देश भर में हिंदुत्व का डंका बजाने में पूज्य बापूजी का सब से बड़ा योगदान रहा हैं और फिर इसी हिंदुत्व के नाम पर बीजेपी ने हिंदू वोटरों को लुभाकर सत्ता हासिल की ।
BJP और RSS को शायद याद नहीं रहा लेकिन मैं याद दिलाता हूं कि इसी मोटेरा आश्रम से हिंदुत्व की ज्वाला फूटी इसी आश्रम से पूज्य बापू जी ने पूरे देशभर में हिंदुत्व का शंखनाद किया, जब देश भर में अधिकत्तर हिंदू समाज सो रहा था तब पूज्य बापू जी ही थे जिन्होंने सनातन संस्कृति का झंडा उठाया।क्या अब उसी हिंदुत्व की कर्मभूमि मोटेरा आश्रम को बीजेपी उखाड़ना चाहती हैं वो भी मात्र एक ओलंपिक-स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए कि उन के ऐसे कदम से करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर कितना गहरा आघात लगेगा। क्या हिंदू संत के आश्रम तोड़ने पर BJP फिर हिंदुत्व की सरकार कहलाएगी?
उन्होंने कहा कि सरकार को करोड़ों भक्तों और साधु संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कोई रास्ता निकालना चाहिए क्यों कि यह आश्रम करोड़ों हिंदुओं की श्रद्धा भक्ति और आस्था का केन्द्र हैं।
Motera Ashram, Motera case : जाने क्या है पूरा मामला?
गुजरात हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में एक चौंका देनेवाला फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार को अनुमति दी कि वह मोटेरा स्थित Sant Shri Asharamji Ashram की लगभग 45,000 वर्ग मीटर भूमि वापस ले सके। यह ज़मीन एक बड़े 650 एकड़ के उस क्षेत्र का हिस्सा है जिसे सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव के लिए चिन्हित किया गया है। इसे 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी और 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि आश्रम ने 1980 में आवंटित मूल 6,261 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर अतिक्रमण किया है। आश्रम पक्ष इससे इनकार करता है और इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताता है।
आश्रम का इतिहास और सामाजिक योगदान
आशारामजी बापू आश्रम पाँच दशकों से न केवल एक धार्मिक केंद्र रहा है, बल्कि यहाँ गुरुकुल, निःशुल्क शिक्षा, महिला उत्थान और गरीब छात्रों के लिए अनेक सेवा-कार्य भी निरंतर चलते आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक — क्या है कानूनी स्थिति?
इस मुद्दे ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया और वहाँ से आश्रम को बड़ी राहत मिली।
27 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने गुजरात सरकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया और गुजरात हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के उस फैसले पर भी रोक लगाई जिसमें सरकार को भूमि वापस लेने की अनुमति दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के शो-कॉज़ नोटिस को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि नोटिस में आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी का अभाव है और यह प्रथम दृष्टया अपूर्ण प्रतीत होता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जो भूमि पहले अतिक्रमण बताई जा रही थी, उसे बाद में नियमित भी किया गया था — तो रातोंरात यह फैसला क्यों बदला गया?
आश्रम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी और दुर्भावनापूर्ण बताया। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में है।
साधु संतों का BJP सरकार पर फूटा गुस्सा
वही दूसरी और मोटेरा आश्रम मामले को लेकर संत समाज ने बीजेपी सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। संतों का कहना है कि खुद को हिंदुत्व की सरकार कहने वाली सरकार में यदि हिंदू आश्रम ही सुरक्षित नहीं हैं, तो यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर आघात है। मोटेरा आश्रम की भूमि को लेकर चल रहे विवाद पर देशभर के कई अखाड़ों के संत-महंत खुलकर विरोध जता रहे हैं।
महामंडलेश्वर महंत श्री दिलीपदासजी, अध्यक्ष, अ.भा. संत समिति, गुजरात, कहते हैं —“बापूजी तो सेवा की मूर्ति हैं। उन्होंने लोगों को धर्म के साथ जोड़ने का भगीरथ कार्य किया है।”यह आश्रम देश-विदेश में फैले आश्रमों का मूल केंद्र माना जाता है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इस स्थान से जुड़ी हुई है।
देश के प्रमुख अखाड़ों के संत-महंत इस मुद्दे पर एकजुट होकर सामने आए हैं। उनकी आवाज़ सिर्फ एक आश्रम बचाने की नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा की है। “खेल का मैदान कहीं भी बन सकता है, आश्रम नहीं”
श्रीमहंत रविन्द्रपुरीजी, सचिव, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, ने सीधा सवाल उठाया — एक महीने के खेल आयोजन के लिए करोड़ों लोगों की दशकों पुरानी आस्था को क्यों तोड़ा जाए? विदेशी मेहमान आएंगे और चले जाएंगे, लेकिन यह आश्रम तो पीढ़ियों से लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
महंत सूर्यांश मुनिजी, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन, ने सरकार से निवेदन किया —
सनातनी तथा संत-महात्मा मानते हैं कि यह सरकार हमारी है तो जब हमारे आश्रम टूटेंगे तो हमारी सरकार कैसे रह जायेगी ?
बाबा बलरामदास हठयोगीजी, राष्ट्रीय महामंत्री, अ.भा. वैष्णव अखाड़ा परिषद, ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि राष्ट्र तभी बचेगा जब अध्यात्म जीवित रहेगा। खेल के मैदान के लिए आध्यात्मिक केंद्र को बलिदान करना राष्ट्र की आत्मा को कमज़ोर करना है।
“धर्म का दोहन हो रहा है”
महंत जगतार मुनिजी, महासचिव, श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन (निर्वाण), ने बेहद तीखे शब्दों में सरकार से सवाल किया — “कौन कहता है कि यह हिन्दुत्व की सरकार है? धरातल पर तो हमको ऐसा कुछ दिखाई नहीं देता, बल्कि धर्म का दोहन हो रहा है।” उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिंदू धर्म के आश्रम समाज-कल्याण और आध्यात्मिक उत्थान के लिए बनते हैं — मनोरंजन के लिए नहीं। धार्मिक स्थल का उपयोग धर्म के कार्यों में ही होना चाहिए।
निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत स्वामी ज्ञानदेव सिंहजी ने तो सरकार को सीधी चेतावनी दी — यदि सरकार इस तरह संतों को प्रताड़ित करती रही, तो हिंदू समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा और इसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
महामंडलेश्वर स्वामी संजय गिरिजी, पंचदशनाम जूना अखाड़ा, ने कहा कि जो लोग धर्म के आधारस्तंभ हैं, उन्हें तोड़कर सनातन धर्म की रक्षा की बात करना विरोधाभास है। उन्होंने सभी से आश्रम की रक्षा में एकजुट होने का आह्वान किया ताकि भारत पुनः विश्वगुरु का दर्जा प्राप्त कर सके।
करोड़ों भक्तों की आस्था का सवाल यह सवाल केवल ज़मीन का नहीं है। यह उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का सवाल है जो दशकों से इस आश्रम से जुड़े हैं, जिन्होंने यहाँ साधना-सेवा की, जिनके जीवन इस केंद्र से प्रेरणा लेते रहे हैं।
महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरिजी, निरंजनी अखाड़ा, ने इस पूरे प्रकरण को बड़े परिप्रेक्ष्य में रखा। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण को रोकने का जितना काम संत आशारामजी ने किया, उतना किसी और ने नहीं किया — और यही उनके विरोध की असली वजह है।
महामंडलेश्वर श्रीमहंत गंगादासजी, बड़ा उदासीन अखाड़ा, ने इसे और सरल शब्दों में रखा — जहाँ संतों का आवागमन होता है, वह स्थान स्वतः तीर्थ बन जाता है। ऐसे स्थान को उजाड़ना सनातन धर्म के सर्वथा विरुद्ध है।
श्री गौरीशंकर गिरिजी, प्रवक्ता, श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती, ने स्पष्ट कहा कि यह आश्रम युवा पीढ़ी में मर्यादा और संयम की भावना जागृत करता है। आज के दौर में देश को ऐसे केंद्रों की सबसे अधिक ज़रूरत है।
FAQ — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: मोटेरा आश्रम मसला क्या है? गुजरात सरकार Asaram Bapu Ashram की लगभग 45,000 वर्ग मीटर भूमि वापस लेकर वहाँ ओलंपिक-स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाना चाहती है। आश्रम पक्ष और संत समाज इसका विरोध कर रहे हैं।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया? अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने सरकार के नोटिस को प्रथम दृष्टया अपूर्ण बताया।
प्रश्न 3: कितने बड़े अखाड़े इस विरोध में शामिल हैं? जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, अ.भा. वैष्णव अखाड़ा परिषद, बड़ा उदासीन अखाड़ा, नया उदासीन अखाड़ा, अखाड़ा निर्मल सहित अनेक प्रमुख अखाड़ों के संत-महंत एकजुट होकर इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।
प्रश्न 4: क्या आश्रम की जगह खेल का मैदान बनाना कानूनी है? सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं इस पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि सरकार का शो-कॉज़ नोटिस प्रथम दृष्टया आवश्यक तथ्यों से रहित है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
प्रश्न 5: Motera Ashram में क्या-क्या गतिविधियाँ चलती हैं? आश्रम में गुरुकुल, आध्यात्मिक सत्संग, निःशुल्क शिक्षा, महिला उत्थान कार्यक्रम, गरीब छात्रों के लिए सहायता और सामाजिक सेवा के अनेक कार्य वर्षों से संचालित होते आए हैं।
प्रश्न 6: संतों की मुख्य माँग क्या है? सभी संत एकस्वर से माँग कर रहे हैं कि आश्रम को न तोड़ा जाए। यदि खेल का मैदान बनाना ज़रूरी है तो सरकार के पास पर्याप्त अन्य भूमि उपलब्ध है। आश्रम की भूमि पर ऐसी कोई संरचना न बनाई जाए।
निष्कर्ष ?
मोटेरा आश्रम चर्चा का एक ऐसा मुद्दा है जिसमें भौतिक विकास और मानव मूल्यों का विकास, आत्मविकास आमने-सामने खड़े हैं। एक तरफ सरकार का ओलंपिक का सपना है, दूसरी तरफ करोड़ों श्रद्धालुओं की पीढ़ियों पुरानी भावनाएँ, विश्वशांति का वैश्विक प्रशिक्षण केंद्र।
संत समाज का कहना तर्कसंगत है — खेल के मैदान के लिए वैकल्पिक भूमि ढूंढी जा सकती है, लेकिन एक बार टूटा आश्रम और एक बार आहत आस्था फिर वैसी नहीं बनती। मानव मूल्यों के विकास का घात करके किया गया भौतिक विकास युद्धों को तथा स्वार्थ, विलासिता, अशांति को जन्म देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति का आदेश देकर इस मुद्दे पर विराम लगाया है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार संत समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए कोई मार्ग निकालेगी?
यह न केवल एक आश्रम का मामला है — यह भारत की सांस्कृतिक पहचान और सनातन धर्म की जड़ों की रक्षा का प्रश्न है।
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अगर आप इस विषय पर और गहरी जानकारी चाहते हैं तो संत श्री आशारामजी आश्रम की सेवा-गतिविधियों और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के बारे में जानने के लिए ashram.org पर जाएं।
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