चंडीगढ़: हरियाणा की नौकरशाही में उस वक्त जबरदस्त भूचाल आ गया, जब करोड़ों रुपये के एक घोटाले में सीबीआई ने सीधे तौर पर एक कद्दावर आईएएस अधिकारी की गर्दन नाप ली। शुरुआत में जिसे सब सिर्फ एक साधारण कागजी गड़बड़ी मान रहे थे, वह दरअसल सफेदपोशों की एक बेहद गंदी और शातिर साजिश निकली। इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब जांच एजेंसी के हाथ एक ऐसी गुप्त ऑडियो रिकॉर्डिंग लग गई, जिसने सीनियर आईएएस पंकज अग्रवाल के रचे हुए पूरे मायाजाल को तार-तार कर दिया।
‘हैलो, 10 करोड़ भेज दो…’ और पलक झपकते ही बिल्डर के खाते में पहुंच गई रकम
यह पूरा मामला किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। जांच अधिकारियों को जो सीक्रेट टेप मिला है, उसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का मैनेजर और इस खेल का मास्टरमाइंड रिभव ऋषि सीधे आईएएस पंकज अग्रवाल से बात कर रहा है। मैनेजर सरकारी खजाने से 10 करोड़ रुपये एक बिल्डर को भेजने की बात कहता है और साहब उसे बेखौफ होकर अपनी हरी झंडी दे देते हैं। इजाजत मिलते ही 14 जनवरी 2026 को एक रद्दी हो चुके (कैंसिल्ड) चेक का इस्तेमाल किया गया और 10 करोड़ रुपये ‘SRR प्लानिंग’ और ‘मन्नत कॉन्ट्रैक्टर्स’ के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। इसी एक अचूक डिजिटल सुबूत ने आईएएस अफसर को सीधे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
जूनियर की लिखित चेतावनी को भी जूते की नोक पर रखा
रुतबे का नशा किस कदर सिर चढ़कर बोल रहा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सारे कायदे-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। जब पंकज अग्रवाल स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव थे, तब उन्होंने वित्त विभाग के नियमों को ताक पर रखकर जबरन आईडीएफसी बैंक में सरकारी खाते खुलवाए। हद तो तब हो गई जब उनके ही एक जूनियर अधिकारी ने इस मनमानी पर लिखित में अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन साहब ने अपने पद का रौब दिखाते हुए उसे पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। नियम था कि खाते में 50 करोड़ से ज्यादा नहीं जा सकते, लेकिन उन्होंने बिना किसी टेंडर के कोटक महिंद्रा बैंक से सीधे 100 करोड़ रुपये निकालकर इस नए बैंक में शिफ्ट कर दिए। सिर्फ इस एक मनमाने फैसले ने सरकारी खजाने को 60 करोड़ से ज्यादा का सीधा चूना लगा दिया।
अब 6 और ‘बड़े साहब’ की उड़ेगी नींद, जेल जाने की बारी
सीबीआई का यह ताजा एक्शन तो महज एक झांकी है, असली पिक्चर अभी पूरी तरह से बाकी है। 657 करोड़ के इस महाघोटाले की आंच सिर्फ पंकज अग्रवाल तक ही सीमित नहीं रहने वाली। अब हरियाणा कैडर के 6 और बड़े आईएएस अधिकारी जांच एजेंसी के रडार पर आ चुके हैं और उनकी रातों की नींद उड़ गई है। अंदरखाने से खबर है कि इनमें से दो अफसर तो खुद को बचाने के लिए सरकारी गवाह बनने को तैयार हैं, लेकिन बाकी चार के हाथों में जल्द ही हथकड़ियां सज सकती हैं। इस रैकेट ने हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के करोड़ों रुपये फर्जी शेल कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाए हैं। 17 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पहले ही दायर हो चुकी है और अब इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद अकूत बेनामी संपत्तियों के राज फाश होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।


A secret call by an IAS officer led to the loss of 657 crore; a conspiracy was hatched with the bank manager




