जालंधर: पंजाब भर में वकीलों द्वारा आहूत हड़ताल का व्यापक असर आज जालंधर समेत पूरे राज्य में देखने को मिला। अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर वकीलों ने अदालती कामकाज का पूरी तरह से बहिष्कार किया, जिसके चलते कोर्ट रूम खाली नजर आए और न्यायिक प्रक्रिया ठप रही। यह हड़ताल मुख्य रूप से अपराधियों को आसानी से जमानत मिलने, ग्राम पुलिस व्यवस्था लागू करने और फैक्टर एक्शन प्लान के तहत पुराने मुकदमों के जल्द निपटारे के दबाव के विरोध में की गई। पंजाब भर के बार एसोसिएशन के अध्यक्षों के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन के कारण आज किसी भी अदालत में कोई भी वकील पेश नहीं हुआ।
अपराधियों को सरकारी संरक्षण और आसान जमानत पर नाराजगी
हड़ताल पर गए वकीलों ने राज्य में बढ़ती लूटपाट और चोरी की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि आज आम और निर्दोष नागरिकों के लिए अदालत से जमानत पाना बेहद मुश्किल हो गया है, जबकि संगीन अपराधों में लिप्त लुटेरों और चोरों को आसानी से जमानत मिल जाती है। वकीलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी नीति के तहत पकड़े गए अपराधियों को न केवल मुफ्त कानूनी सहायता दी जा रही है, बल्कि उनकी जमानत की राशि का भी इंतजाम किया जा रहा है। इस व्यवस्था से अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि सरकारी तंत्र उन्हें बचा लेगा।
गांवों में अदालतें लगाने के फरमान का कड़ा विरोध
वकीलों की नाराजगी का दूसरा बड़ा कारण ग्राम पुलिस व्यवस्था और गांवों में जाकर अदालतें लगाने का निर्देश है। इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए वकीलों ने तर्क दिया है कि अगर न्याय प्रणाली का इस तरह विकेंद्रीकरण करना ही है, तो इसकी शुरुआत देश की सर्वोच्च अदालत से होनी चाहिए। उनका सुझाव है कि दक्षिण या पूर्वी राज्यों से आने वाले लोगों के लिए उनके ही राज्य में सुप्रीम कोर्ट की बेंच स्थापित की जानी चाहिए। इसी तर्ज पर पंजाब में हाई कोर्ट के लिए केवल चंडीगढ़ पर निर्भर रहने के बजाय गुरदासपुर और पटियाला जैसे अन्य जिलों में भी इसकी बेंच स्थापित की जानी चाहिए, न कि वकीलों को गांवों में जाकर अदालत लगाने पर मजबूर किया जाए।
फैक्टर एक्शन प्लान से न्याय मिलने में हो रही जल्दबाजी
तीसरा और अहम मुद्दा मुकदमों के निपटारे के लिए बनाए गए फैक्टर एक्शन प्लान से जुड़ा है। वकीलों का स्पष्ट कहना है कि इस योजना के तहत पहले तो मामलों को सालों तक लंबित रखकर पुराना होने दिया जाता है और फिर अचानक उनके शीघ्र निपटारे के सख्त निर्देश दे दिए जाते हैं। वकीलों के अनुसार, इस तरह की जल्दबाजी से न्यायिक प्रक्रिया और वकीलों पर अनावश्यक दबाव तो बढ़ता ही है, साथ ही न्याय की मूल भावना भी आहत होती है जिससे असल पीड़ितों को सही मायनों में इंसाफ नहीं मिल पाता है।

A lawyers’ strike in Punjab has brought court proceedings to a complete standstill, with courtrooms empty in protest




