जालंधर: जालंधर के जमशेर खास में स्थापित किए जा रहे बायो-गैस और बायो-फ्यूल प्लांट को लेकर चल रहा विरोध अब और भी उग्र रूप लेता जा रहा है। स्थानीय निवासियों, किसानों और विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने एक स्वर में इस परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोगों का तर्क है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह का प्लांट लगाना खतरनाक साबित हो सकता है और यह भविष्य में लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
मंडी के अस्तित्व और प्रदूषण को लेकर चिंता
भारतीय किसान यूनियन (सिद्धूपुर) ने प्लांट के निर्माण की रूपरेखा, विशेषकर उसके प्रवेश द्वार (गेट) को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। किसान नेताओं के अनुसार, प्लांट में दो गेट लगाए जा रहे हैं, जिनमें से एक गेट सीधे मंडी की तरफ खोला जा रहा है। किसानों का कहना है कि मंडी की तरफ गेट बनाना पूरी तरह से गलत निर्णय है। यदि इस गेट का निर्माण नहीं रोका गया, तो इससे मंडी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा और वहां का कामकाज ठप हो सकता है। इसके अलावा, किसानों ने प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है, जिससे आसपास के पर्यावरण और फसलों को नुकसान होने की आशंका है।
सोमवार दोपहर 12 बजे से अनिश्चितकालीन चक्का जाम
प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इससे पहले किसान यूनियन सिद्धूपुर ने 1 जनवरी को अमृतसर-दिल्ली हाईवे जाम करने की घोषणा की थी, लेकिन संत रविदास जयंती और प्रधानमंत्री के दौरे को ध्यान में रखते हुए उस समय प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया था। अब किसानों ने 2 जनवरी (सोमवार) को हाईवे जाम करने की अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, किसान दोपहर 12 बजे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पहले, परागपुर जाने वाले कट पर हाईवे पर धरना देंगे और ट्रैफिक पूरी तरह से रोक देंगे। किसान नेताओं ने दो टूक कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, वे हाईवे से नहीं हटेंगे।

Farmers in Jalandhar will block the highway today as protests against the bio-gas plant intensify




