चंडीगढ़: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा 12वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाएं फरवरी के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जा रही हैं, लेकिन इससे पहले शुरू होने वाली प्रैक्टिकल परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 2 से 12 फरवरी के बीच होने वाली इन परीक्षाओं के लिए जारी ड्यूटी लिस्ट ने शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया है। बोर्ड ने संबंधित विषय के लेक्चरार्स की जगह बड़ी संख्या में मास्टर कैडर के उन शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी है, जो आमतौर पर छठी से दसवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन शिक्षकों के पास 12वीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाने का न तो कोई अनुभव है और न ही विषय की विशेषज्ञता।
गणित वाले लेंगे फिजिक्स का प्रैक्टिकल, वोकेशनल शिक्षक भी परेशान
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए खुलासा किया है कि ड्यूटियों में विषयों का भी कोई मेल नहीं रखा गया है। हालात यह हैं कि कई जगहों पर मास्टर कैडर के गणित अध्यापकों को फिजिक्स, बायोलॉजी और केमिस्ट्री जैसे विज्ञान विषयों की प्रैक्टिकल परीक्षा लेने के लिए तैनात कर दिया गया है। इसी तरह, एनएसक्यूएफ (NSQF) के तहत वोकेशनल शिक्षा देने वाले शिक्षकों की ड्यूटी भी अन्य विषयों की परीक्षाएं लेने के लिए लगा दी गई है। इसके अलावा, शिक्षकों को परीक्षा लेने के लिए लंबी दूरी वाले स्कूलों में भेजा जा रहा है, जिससे उनमें भारी रोष है।
शिक्षा क्रांति के दावों पर उठे सवाल
डीटीएफ पंजाब के अध्यक्ष विक्रमदेव सिंह, महासचिव महेंद्र कौड़ियांवाली और वित्त सचिव अश्विनी अवस्थी ने बोर्ड के इस कदम की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे छात्रों और शिक्षकों दोनों के साथ घोर अन्याय बताया है। शिक्षक नेताओं ने सवाल उठाया कि जिस शिक्षक ने अपने छात्र जीवन में भी कोई विशिष्ट विषय नहीं पढ़ा और न ही कभी उसे पढ़ाया, वह उस विषय की प्रैक्टिकल परीक्षा में छात्रों का सही मूल्यांकन कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अव्यवस्था पंजाब सरकार द्वारा प्रचारित तथाकथित ‘शिक्षा क्रांति’ के दावों की पोल खोलती है और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।
स्कूलों में 7000 लेक्चरार्स के पद खाली, सरकार कर रही लीपापोती
शिक्षक नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में विभिन्न विषयों के लेक्चरार्स के 7000 से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। सरकार नई भर्ती या पदोन्नति (प्रमोशन) के जरिए इन पदों को भरने के बजाय मास्टर कैडर के शिक्षकों पर काम थोपकर किसी तरह समय काट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में एक भी नए लेक्चरार की भर्ती नहीं हुई है, जबकि हजारों योग्य उम्मीदवार बेरोजगार हैं। सरकार केवल स्कूलों को रंग-रोगन करके सस्ती लोकप्रियता हासिल करने में लगी है, जबकि हकीकत में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की संख्या घट रही है। संगठन ने मांग की है कि प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए केवल संबंधित विषय के विशेषज्ञों की ही ड्यूटी लगाई जाए और खाली पड़े पदों को तुरंत भरा जाए।

Punjab School Education Board’s arbitrary order: A major controversy has erupted over practical examinations.




