मोहाली: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) और शिक्षा विभाग के लिए साल 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक बदलावों और चुनौतियों से भरा रहा। यह साल जहां एक तरफ परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों और तकनीक के समावेश के लिए याद रखा जाएगा, वहीं दूसरी तरफ किताबों के करोड़ों रुपये के घोटाले और शिक्षकों के धरनों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान भी लगाए। बोर्ड ने इस साल 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के नतीजे समय पर जारी करके अपनी विश्वसनीयता को मजबूत करने की कोशिश की, जिसमें सरकारी स्कूलों के छात्रों का प्रदर्शन सराहनीय रहा।
परीक्षा पैटर्न में ऐतिहासिक बदलाव शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बोर्ड ने इस साल सबसे बड़ा फैसला ‘रट्टा मार प्रणाली’ को खत्म करने का लिया। नए नियमों के तहत अब छात्रों को रटंत विद्या की बजाय गहराई से पढ़ाई करनी होगी। बोर्ड ने प्रश्न पत्रों में कठिन प्रश्नों का स्तर 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया है। इतना ही नहीं, अब 25 फीसदी प्रश्न सीधे पाठ (चैप्टर) के बीच से पूछे जाएंगे, जिससे छात्रों को पूरा सिलेबस ध्यान से पढ़ना अनिवार्य हो गया है। साथ ही, बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) की हिस्सेदारी 40 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दी गई है ताकि छात्रों की सृजनात्मक क्षमता को बढ़ावा मिल सके।
हाईटेक हुई शिक्षा और नई लीडरशिप तकनीकी युग के साथ कदम मिलाते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने दिसंबर 2025 में एक बड़ी पहल की। उन्होंने राज्य के 25 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ‘एआई करियर गाइडेंस लैब्स’ की शुरुआत की। ये लैब्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए छात्रों की रुचि परखकर उन्हें सही करियर चुनने में मदद करेंगी। प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव हुआ। मार्च 2025 में पंजाब सरकार ने पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अमरपाल सिंह को बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया। सात महीने से खाली पड़े इस पद को संभालते ही उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम की समीक्षा की और पारदर्शिता लाने का वादा किया।
किताबों का बड़ा घोटाला और विवाद तमाम सुधारों के बीच साल के अंत में उजागर हुए एक बड़े घोटाले ने बोर्ड की छवि को धूमिल कर दिया। दिसंबर में जालंधर और कपूरथला के क्षेत्रीय बुक डिपो में किताबों की खरीद-फरोख्त में करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आई। ऑडिट रिपोर्ट में साल 2018 से 2022 के बीच भारी गड़बड़ी पाई गई, जिसके बाद चेयरमैन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन कर्मचारियों को चार्जशीट किया। इसके अलावा नकली भर्ती अलर्ट, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और 12वीं की इतिहास की किताब को लेकर अकाली दल द्वारा कमेटी मेंबर्स की गिरफ्तारी की मांग जैसे विवाद भी पूरे साल चर्चा में रहे।
सड़कों पर डटे रहे शिक्षक साल भर शिक्षा विभाग के कर्मचारी और शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष करते नजर आए। कच्चे अध्यापकों ने पक्का होने और वेतन बढ़ोतरी के लिए मोहाली बोर्ड दफ्तर के बाहर कई बार बड़े प्रदर्शन किए। विशेष रूप से स्पेशल एजुकेटर्स का धरना साल के अंत तक 127वें दिन में प्रवेश कर गया, जो नई भर्ती की बजाय पुराने मुलाजिमों को पक्का करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, साल जाते-जाते 23 दिसंबर को सरकार ने शिक्षक ट्रांसफर पॉलिसी में कुछ ढील देकर थोड़ी राहत देने की कोशिश जरूर की।
कुल मिलाकर साल 2025 शिक्षा सुधारों की नींव रखने वाला साल रहा, लेकिन घोटालों और प्रशासनिक खींचतान ने विभाग के सामने कई चुनौतियां भी पेश कीं।

The year 2025 was a mixed bag for the Punjab Education Board




