लुधियाना: शहर के 32 वर्षीय हौजरी कारोबारी भवनीश जैन ने अदम्य साहस और जुनून की नई मिसाल पेश की है। पर्वतारोहण के प्रति दीवानगी ऐसी कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम ही दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी ‘K-2’ के नाम पर रख दिया। इसी जुनून के दम पर भवनीश ने हाल ही में लेह-लद्दाख की 6080 मीटर ऊंची यूटी-कांगड़ी हिल (UT-Kangri Hill) को फतह कर वहां देश का तिरंगा और जैन ध्वज फहराया है। नोएडा की पर्वतारोही पूजा के साथ महज चार दिनों में इस अभियान को पूरा कर लौटे भवनीश अब तक देश की 22 ऊंची चोटियों को अपने कदमों से नाप चुके हैं।
हैरानी की बात यह है कि भवनीश ने पर्वतारोहण जैसे बेहद तकनीकी और जोखिम भरे क्षेत्र में बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के कदम रखा था। उन्होंने बिना कोई कोर्स किए ही 6000 मीटर की दो चोटियां, एवरेस्ट बेस कैंप-3 और लेह की स्टोक कांगड़ी जैसी कठिन चढ़ाइयां पूरी कर ली थीं। हालांकि, साल 2020 में उत्तराखंड की कालिंदी खाल चोटी के सफर के दौरान उन्हें तकनीकी ज्ञान की कमी महसूस हुई। इसके बाद, उन्होंने दार्जिलिंग के प्रतिष्ठित हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (HMI) में दाखिला लिया और अप्रैल 2025 में अपना प्रोफेशनल कोर्स पूरा कर अब वे तकनीकी रूप से भी पूरी तरह दक्ष हो गए हैं। उनकी इच्छाशक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2019 में गंभीर रूप से बीमार होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और ठीक होते ही 6000 मीटर से ऊंची तीन चोटियां फतह कर डालीं।
पहाड़ों के सफर के दौरान भवनीश ने कई बार मौत को करीब से देखा है। अपने एक खौफनाक अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि गंगोत्री से बद्रीनाथ के बीच कालिंदी खाल ट्रेक के दौरान 110 किलोमीटर के रास्ते में उनका एक साथी गले तक बर्फ में धंस गया था। उसे बचाने की कोशिश में वे खुद भी बर्फ में फंस गए थे। उस 13 दिनों की यात्रा में हालात इतने बिगड़ गए थे कि दो दिन तक उन्हें बिना भोजन के रहना पड़ा और सिर्फ सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) के सहारे जान बचानी पड़ी। अंत में माणा टॉप स्थित आर्मी कैंप पहुंचने पर उन्हें भोजन और मदद मिली, जिससे उनकी जान बची।
पहाड़ों के इस खिलाड़ी का अब अगला लक्ष्य दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर विजय पताका फहराना है। भवनीश ने बताया कि वे मुख्य रूप से माउंट एवरेस्ट फतह करने की योजना बना रहे हैं। इस महाअभियान से पहले वे खुद को परखने के लिए 7000 मीटर ऊंची कुछ चोटियों को फतह करेंगे, ताकि एवरेस्ट के सपने को सुरक्षित और सफल तरीके से साकार किया जा सके।

A businessman from Punjab named his daughter ‘K-2’, conquered 22 peaks without any training




