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पंजाब में पुलिसिया तंत्र की पोल खुली: ढाई महीने पहले चोरी हुई बाइक के कट रहे चालान, चोर की मौज और मालिक को सजा

लुधियाना: औद्योगिक नगरी लुधियाना में वाहन चोरी की बढ़ती वारदातों के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हाईटेक पुलिसिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। जिस मोटरसाइकिल को उसका मालिक चोरी होने के बाद हमेशा के लिए खो चुका मानकर हताश बैठा था, वही बाइक अब न सिर्फ शहर की सड़कों पर दौड़ रही है, बल्कि उसके यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चालान भी मालिक के घर पहुंच रहे हैं। पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली का यह नमूना अब शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह अजीबोगरीब मामला फतेहपुर बाजवा चौक निवासी राहुल सचदेवा के साथ पेश आया है। राहुल के मुताबिक, 17 सितंबर को दोपहर करीब साढ़े चार बजे उन्होंने अपनी हीरो होंडा स्प्लेंडर प्लस (नंबर PB-91-E-5367) माता रानी चौक स्थित एक स्पेयर पार्ट्स की दुकान के बाहर खड़ी की थी। मुश्किल से 15 मिनट बाद जब वह वापस लौटे तो बाइक वहां से गायब थी। काफी तलाशने के बाद उन्होंने तुरंत थाना कोतवाली में चोरी की शिकायत दर्ज करवाई। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने शिकायत तो ले ली, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और फाइल ठंडे बस्ते में चली गई।

हैरानी तब हुई जब चोरी की घटना के करीब दो महीने बाद राहुल के मोबाइल पर अचानक ई-चालान के मैसेज आने शुरू हो गए। पहले तो उन्हें लगा कि कोई गलती हुई है, लेकिन जांचने पर पता चला कि ये चालान उनकी उसी चोरी हुई बाइक के हैं। पहला चालान 29 सितंबर को लुधियाना के गिल चौक पर कटा और दूसरा चालान 7 नवंबर को खन्ना के ललहेड़ी रोड पर काटा गया। यानी चोर न केवल लुधियाना में बेखौफ घूम रहा है, बल्कि वह बाइक लेकर खन्ना तक का सफर भी तय कर रहा है और ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है।

इस घटना ने पुलिस के आपसी तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज थी, तो चालान काटते समय सिस्टम में यह अलर्ट क्यों नहीं आया कि वाहन चोरी का है। आम तौर पर ई-चालान व्यवस्था और क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का डेटा आपस में लिंक होना चाहिए, लेकिन यहां चोर बिना हेलमेट और ओवरस्पीडिंग कर रहा है और जुर्माना पीड़ित मालिक के खाते में जुड़ रहा है। चोर बेखौफ है और सिस्टम लाचार नजर आ रहा है।

पीड़ित राहुल सचदेवा ने अब पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन चालानों को ही सुराग मानकर जांच आगे बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि ई-चालान की लोकेशन, समय और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के जरिए चोर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह चालान पुलिस के लिए एक ‘सरकारी सुराग’ की तरह हैं। अब देखना यह होगा कि लुधियाना पुलिस इन सबूतों के आधार पर बाइक चोर को गिरफ्तार कर पाती है या फिर राहुल को अपनी चोरी हुई बाइक के और नए चालानों का इंतजार करना पड़ेगा।

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