
दार्जिलिंग: मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर और दिल्ली के कालका जी मंदिर के बाद अब ‘पहाड़ों की रानी’ दार्जिलिंग के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में भी लड़कियों के छोटे कपड़े पहनकर आने पर रोक लगा दी गई है।
मंदिर समिति ने दक्षिण भारत के मंदिरों की तर्ज पर ड्रेस कोड के इस फैसले को लागू किया है। समिति के इस कदम से एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक बेहतर उपाय बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन मान रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में स्थित यह प्रसिद्ध महाकाल मंदिर अपने इस नए नियम को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है। मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि अब लड़कियों और महिलाओं को शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट या किसी भी प्रकार के अन्य छोटे या अशोभनीय माने जाने वाले कपड़ों में मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

मंदिर समिति के जिम्मेदारों ने बताया कि यह फैसला काफी विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उनका कहना है, “छोटे कपड़े पहनकर आने से मंदिर का वातावरण खराब हो रहा था।” इसी को देखते हुए समिति ने इसी हफ्ते से मंदिर में यह नया ड्रेस कोड सख्ती से लागू कर दिया है।
जहां एक तरफ कई श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस फैसले को मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने इसे निजी आजादी पर हमला बताया है।
गौरतलब है कि देश के कई बड़े मंदिरों में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है। अब यह देखना होगा कि दार्जिलिंग महाकाल मंदिर समिति इस व्यवस्था को सुचारू रूप से कैसे जारी रखती है और इस दौरान उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
View this post on Instagram


Dress code implemented in Mahakal temple




