
गोपेश्वर: उत्तराखंड में बुधवार की रात आसमान से आफत बरसी। चमोली जिले में हुई भीषण वर्षा और बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई है। नदी-नालों में आए विकराल उफान और भारी मलबे ने नंदानगर घाट इलाके में दर्जनभर घरों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें 10 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दलों ने दो लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है।
जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार देर रात नंदानगर घाट इलाके में बादल फटने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। नंदानगर के कुंत्री लांगाफली वार्ड में छह घर पूरी तरह से मलबे में समा गए, जिसमें आठ लोग लापता हो गए। वहीं, धुर्मा गांव में दो लोगों के लापता होने की खबर है। धुर्मा में पांच अन्य भवनों को भी क्षति पहुंची है, हालांकि वहां किसी जनहानि की सूचना नहीं है। मोक्ष नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे आस-पास के इलाकों में दहशत का माहौल है।

इस आपदा का असर देहरादून और मसूरी तक देखने को मिल रहा है। देहरादून के रायवाला क्षेत्र में 200 से अधिक परिवार बाढ़ के पानी में घिर गए हैं, जिन्हें एसडीआरएफ की टीम सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई है। वहीं, भूस्खलन के कारण मसूरी जाने वाले रास्ते को कोठालगेट से आगे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है और पर्यटकों को फिलहाल मसूरी जाने से रोक दिया गया है।
आपदा की सूचना मिलते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। एसडीआरएफ की टीम नंदप्रयाग पहुंच चुकी है, जबकि एनडीआरएफ की एक टीम भी गौचर से नंदप्रयाग के लिए रवाना हो गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने बताया कि मेडिकल टीम के साथ तीन 108 एम्बुलेंस भी मौके पर भेज दी गई हैं ताकि घायलों को तत्काल इलाज मुहैया कराया जा सके। क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग बह जाने के कारण बचाव कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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