
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सोमवार को पति-पत्नी के यौन संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक वयस्क पत्नी के साथ सहमति से हो या बिना सहमति के यौन संबंध स्थापित करने पर पति को बलात्कार या अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोपों का सामना नहीं करना पड़ेगा। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। इस मामले में निचली अदालत ने पति को बलात्कार का दोषी ठहराया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति व्यास ने अपने फैसले में कहा कि यौन संबंध या अप्राकृतिक संभोग के मामले में पत्नी की ‘सहमति’ को कानूनी रूप से महत्वहीन माना जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम नहीं है, तो पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ किया गया कोई भी यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएगा, भले ही पत्नी ने अप्राकृतिक कृत्य के लिए सहमति न दी हो। इसलिए, उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता पति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) और 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) के तहत दर्ज अपराधों को निरस्त कर दिया।
क्या था मामला?
यह मामला 11 दिसंबर, 2017 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए थे। इस घटना के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां बाद में उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु पूर्व दिए गए बयान में महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसके साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाए थे। डॉक्टरों ने भी महिला के आरोपों की पुष्टि की थी। निचली अदालत ने आरोपी पति को 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अब उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया है। आरोपी जगदलपुर का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार, महिला अपनी पहली डिलीवरी के बाद से बवासीर से पीड़ित थी और उसे लगातार रक्तस्राव होता रहता था। इसके साथ ही उसे पेट में भी दर्द रहता था, जिससे उसकी स्थिति और जटिल हो गई थी।

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Unnatural sex without wife’s consent is not a crime








