चंडीगढ़: पंजाब के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले में चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। लंबे समय से जांच के घेरे में चल रहे पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल समेत तीन दिग्गज सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बड़ी राहत देते हुए क्लीन चिट दे दी है। विजिलेंस की विस्तृत जांच में इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने वाला कोई भी ठोस सबूत नहीं मिल सका है। इस बड़े फैसले ने पंजाब की सियासत और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर से भारी हलचल मचा दी है।
हाई कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट, नहीं मिला रिश्वत का कोई सुराग
विजिलेंस ब्यूरो की ओर से क्लीन चिट पाने वाले इन बड़े नामों में पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू और पूर्व सिंचाई सचिव काहन सिंह पन्नू का नाम भी शामिल है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद विजिलेंस ने अपनी जांच पूरी कर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। दरअसल, 15 मई 2026 को हाई कोर्ट ने विजिलेंस को 15 दिन के भीतर जांच पूरी करने का अल्टीमेटम दिया था। ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत लेने या किसी भी तरह की कथित अनियमितता में शामिल होने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य (सबूत) सामने नहीं आया है।
ठेकेदार के बयान पर फंसा था पेंच, नहीं हुई कोई रिकवरी
आपको बता दें कि इन तीनों सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ जांच मुख्य रूप से इस घोटाले के मुख्य आरोपित ठेकेदार गुरिंदर सिंह के एक बयान के आधार पर शुरू की गई थी। ठेकेदार ने 21 दिसंबर 2017 को एक ‘डिस्क्लोजर स्टेटमेंट’ दिया था। लेकिन विजिलेंस ने अपनी जांच में पाया कि इस बयान में जिन भारी-भरकम रकमों का जिक्र किया गया था, उनकी कभी कोई बरामदगी (रिकवरी) ही नहीं हो सकी। यहां तक कि यह बयान मूल एफआईआर के चालान का हिस्सा भी नहीं था। ऐसे में बिना किसी रिकवरी के, सिर्फ एक बयान के आधार पर इन दिग्गज अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को विजिलेंस ने पूरी तरह से नाकाफी माना।
588 पन्नों की फाइलों में खंगाला गया सच
विजिलेंस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए 588 पन्नों की भारी-भरकम जांच सामग्री, पुलिस फाइलें, चालान और गवाहों के बयानों को बारीकी से खंगाला। इस दौरान सिंचाई विभाग में परियोजनाओं की प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर आवंटन से लेकर भुगतान जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया की गहन पड़ताल की गई। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी भी गवाह ने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के आरोपों का समर्थन नहीं किया। जांच टीम को विभागीय रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं में भी इन अधिकारियों की संलिप्तता का कोई स्पष्ट लिंक या सबूत नहीं मिला।
जानिए क्या है अकाली-भाजपा शासन से जुड़ा यह पूरा घोटाला
यह पूरा घोटाला साल 2007 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान का है। उस वक्त सिंचाई और ड्रेनेज परियोजनाओं के टेंडर में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। कहा गया था कि एक विशेष ठेकेदार को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों के साथ छेड़छाड़ की गई, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा। इस बड़े मामले में विजिलेंस अब तक 32 आरोपितों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है, जिनमें 26 सरकारी कर्मचारी और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। मई 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां कुर्क की थीं। फिलहाल विजिलेंस ने तीनों अधिकारियों की रिपोर्ट सचिव को सौंप दी है, जिसके बाद अब हाई कोर्ट के फैसले से ही इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।


Three senior IAS officers, including a former Chief Secretary, have received a clean chit




