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पंजाब की सियासत में बड़ा दांव! बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा की पैरोल को लेकर CM मान ने राज्यपाल से की अहम मुलाकात

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने ‘पंथक’ राजनीति में एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है, जिसने पूरे सूबे की सियासत में हलचल तेज कर दी है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 1995 में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के हाई-प्रोफाइल मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को पैरोल दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। बुधवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से अहम मुलाकात के बाद सीएम मान ने पूरी उम्मीद जताई है कि हवारा को जल्द ही जेल से बाहर आने की इजाजत मिल सकती है। मान के इस कदम को पंथक वोट बैंक में सेंधमारी के एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है।

राज्यपाल ने दिया केंद्रीय गृह सचिव से बात करने का भरोसा

मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के बीच बुधवार सुबह करीब 30 मिनट तक लंबी बैठक चली। इससे कुछ दिन पहले ही मान ने राज्यपाल को पत्र लिखकर हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की जोरदार वकालत की थी। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्यपाल कटारिया ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह इस संवेदनशील मामले में खुद केंद्रीय गृह सचिव से बात करेंगे। राज्यपाल ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह जल्द से जल्द हवारा की पैरोल से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज देंगे। बता दें कि हवारा तिहाड़ जेल से भागने के कुछ महीनों को छोड़कर अपनी गिरफ्तारी के बाद से लगातार जेल में बंद है और फिलहाल दिल्ली की एक उच्च सुरक्षा वाली जेल में कैद है।

‘कानून-व्यवस्था नहीं बिगड़ेगी, कोई नारेबाजी नहीं होगी’

हवारा के बाहर आने से राज्य का माहौल खराब होने की आशंकाओं पर सीएम मान ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि मैंने राज्यपाल को व्यक्तिगत रूप से यह गारंटी दी है कि हवारा के पैरोल पर बाहर आने से पंजाब में कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा नहीं होगी। मान ने दावा किया कि हवारा के साथियों और उसके परिवार से जुड़े सिख संगठनों ने उन्हें भरोसा दिया है कि इस दौरान कोई हंगामा या नारेबाजी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हम सिर्फ मानवीय आधार पर उसकी पैरोल की मांग कर रहे हैं। हवारा की बूढ़ी और कमजोर मां 31 सालों से अपने बेटे का इंतजार कर रही है। परिवार का कहना है कि वह इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि अब सिर्फ हवारा का नाम लेने पर ही प्रतिक्रिया देती हैं।

‘गुरु दोखी’ घोषित होने के बाद पंथक राजनीति में मान की वापसी की कोशिश

हवारा की पैरोल की इस कवायद के पीछे गहरी राजनीतिक बिसात बिछी हुई है। कुछ ही महीनों में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी अब उस ‘पंथक’ राजनीतिक अखाड़े में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, जिस पर अब तक अकाली दल के विभिन्न धड़ों का दबदबा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा मुख्यमंत्री मान को ‘गुरु दोखी’ (गुरु का दोषी) घोषित किए जाने के बाद, अगर हवारा को पैरोल मिलती है, तो यह पंथक राजनीति में मान की एक मजबूत वापसी मानी जाएगी।

पंथक सियासत में अचानक आई तेजी

मुख्यमंत्री मान की राज्यपाल से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में पंथक राजनीति नए मोड़ ले रही है। हाल ही में अकाली दल पुनर सुरजीत के ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने बयान दिया था कि पंथक राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए 35 प्रतिशत टिकट ‘शहीद परिवारों’ (जिनके सदस्यों ने सिख धर्म की रक्षा के लिए जान दी) के रिश्तेदारों को दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, अकाली दल वारिस पंजाब दे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को बस्सी पठाना से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मियां पहले ही चरम पर पहुंच चुकी हैं।

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