
एंटानानारिवो: नेपाल और केन्या के बाद अब अफ्रीकी देश मेडागास्कर में भी युवा पीढ़ी ‘जेन-जी’ की ताकत ने तख्तापलट जैसी स्थिति पैदा कर दी है। पानी, बिजली और बुनियादी सुविधाओं की कमी से नाराज हजारों युवाओं के उग्र आंदोलन के बाद राष्ट्रपति एंड्री राजोइलिना देश छोड़कर चले गए हैं। विपक्षी नेताओं, सेना के एक धड़े और विदेशी राजनयिकों ने भी उनके देश से पलायन करने की पुष्टि की है।
मेडागास्कर में यह आंदोलन 25 सितंबर को सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में बदल गया। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति राजोइलिना के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे थे। आंदोलन का निर्णायक मोड़ तब आया जब रविवार को सेना की एक टुकड़ी भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आ गई, जिससे राष्ट्रपति पर भारी दबाव बन गया।

विपक्षी नेता सितेनी ने मीडिया को बताया कि सेना के बदलते रुख के बाद राष्ट्रपति एंड्री राजोइलिना बिना किसी को सूचित किए देश से चले गए। उनके कार्यालय के कर्मचारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है।
हालांकि, राष्ट्रपति भवन ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सोमवार देर रात फेसबुक पर जारी एक वीडियो संदेश में एंड्री राजोइलिना ने कहा कि वह अपनी पत्नी की सुरक्षा के लिए एक “सुरक्षित स्थान” पर चले गए हैं। उन्होंने अपनी लोकेशन का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि वह “मेडागास्कर को बर्बाद नहीं होने देंगे।
सूत्रों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति फ्रांस के एक सैन्य विमान से देश छोड़कर गए हैं। गौरतलब है कि मेडागास्कर पहले एक फ्रांसीसी उपनिवेश था। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस मामले में किसी भी तरह की आधिकारिक जानकारी होने से इनकार किया है। इस घटनाक्रम ने नेपाल के बाद एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे सोशल मीडिया से संगठित युवा आंदोलन स्थापित सत्ताओं को चुनौती दे सकता है।
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this country is now witnessing a Gen-Z revolution








