
जालंधर: फिल्लौर-लुधियाना हाईवे के पास सतलुज नदी में मंगलवार को अचानक उफान आ गया और पानी खतरे के निशान को पार कर गया। देखते ही देखते नदी किनारे बसे कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए और वहां फंसे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालात इतने बेकाबू हो गए कि लोगों को बचाने के लिए सेना तक को बुलाना पड़ा। जैसे ही सेना का हेलीकॉप्टर बचाव के लिए पहुंचा, तो लोगों में हड़कंप मच गया और एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत हुई।
लेकिन घबराइए नहीं! यह कोई असली बाढ़ नहीं थी, बल्कि बाढ़ जैसी किसी भी आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक मेगा मॉक ड्रिल थी। डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल के नेतृत्व में इस अभ्यास का आयोजन किया गया, ताकि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
इस मॉक ड्रिल का आयोजन सतलुज नदी के किनारे गांव तलवंडी कलां में किया गया। इसमें यह परिदृश्य बनाया गया कि नदी में बाढ़ आ गई है और लोग फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पंजाब पुलिस, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न विभागों की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। सेना के हेलीकॉप्टर से कमांडो को नीचे उतारा गया, जबकि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने अपनी बोट्स के जरिए पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना और आपदा के समय प्रतिक्रिया देने की क्षमता को जांचना है। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के दौरान जो भी छोटी-मोटी कमियां सामने आई हैं, उन्हें तत्काल दूर किया जाएगा ताकि किसी भी वास्तविक आपदा के समय शून्य त्रुटि के साथ काम किया जा सके। इस मौके पर एसडीएम फिल्लौर लाल विश्वास बैंस समेत सेना व जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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rescue operation in Jalandhar








