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जालंधर में बिना इंश्योरेंस और काले शीशे वाली पुलिस मुलाजिम की स्विफ्ट गाड़ी का एक्सीडेंट, पुलिस ही उड़ा रही ट्रैफिस रूल्स की धज्जियां, तेज रफ्तार या बंद पड़ी ट्रैफिक लाइट्स बनीं हादसे की वजह! सवालों के घेरे में Traffic Police!

जालंधर (Aman Bagga): जालंधर के संविधान चौक में शुक्रवार सुबह बजे हुए थार और स्विफ्ट गाड़ी के एक्सीडेंट के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मामले को सुलझाने के लिए किए जा रहे प्रयास फिलहाल बेनतीजा साबित हुए हैं। दोनों क्षतिग्रस्त गाड़ियां इस समय पुलिस थाना छोटी बारादरी की पुलिस के कब्जे में हैं, जबकि दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाने के लिए आयोजित की गई मीटिंग भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।

स्विफ्ट गाड़ी एक ट्रैफिक पुलिस मुलाजिम की बताई जा रही है। आरोप है कि संबंधित गाड़ी का इंश्योरेंस तक नहीं है, जिसको लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार स्विफ्ट गाड़ी ग्रीन सिग्नल के आधार पर संविधान चौक (बीएमसी) पार कर रही थी। हालांकि इस की भी अभी कोई सबूतों के आधार पर पुष्टि नहीं हुई हैं, दूसरी तरफ से आ रही थार गाड़ी के चालक का दावा है कि उसने चौक पर लगी ट्रैफिक लाइट देखी तो लाइट्स खराब होने के कारण बंद थी। इसी आधार पर उसने चौक पार करने की कोशिश की।

इसी दौरान दूसरी तरफ से आ रही स्विफ्ट गाड़ी जाकर थार गाड़ी से टकरा गई, दोनों वाहनों के बीच जोरदार टक्कर की वजह से थार गाड़ी को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन स्विफ्ट गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहन मालिकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और मामला पुलिस थाने तक पहुंच गया। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

थार मालिक का आरोप है कि स्विफ्ट गाड़ी चला रहा पुलिस मुलाजिम रेड सिग्नल होने पर चौक पार कर रहा था उस ने दाएं बाएं यह नहीं देखा कि कही कोई गाड़ी तो नहीं आ रही, जिसके चलते वह मेरी थार गाड़ी से जा टकराई।

उन्होंने कहा कि ट्रैफिक नियमों के मुताबिक किसी भी चौक को पार करते समय वाहन की गति नियंत्रित और धीमी होनी चाहिए। उनका कहना है कि स्विफ्ट गाड़ी की रफ्तार काफी तेज थी।

थार चालक ने आरोप लगाया कि संबंधित पुलिस मुलाजिम खुलेआम ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर रहा था। उनका दावा है कि स्विफ्ट गाड़ी के अगले शीशे काले करवाए हुए हैं और वाहन बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ाया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बावजूद आज तक उक्त वाहन के खिलाफ पुलिस विभाग ने कोई चालान नहीं किया।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के ट्रैफिक विभाग के पुलिसकर्मियों के लिए इंश्योरेंस कराना अनिवार्य नहीं है , और विभाग की तरफ से उन्हें शीशे काले करवाने की क्या कोई खास परमिशन दी गई हैं क्या उन का कोई चालान नहीं काटा जा सकता।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कानून लागू करवाने वाले ही नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

थार मालिक ने इस पूरे मामले में ट्रैफिक विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि संविधान चौक की ट्रैफिक लाइट्स समय रहते ठीक कर दी जातीं तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी। उनके अनुसार खराब ट्रैफिक सिग्नल इस हादसे की सबसे बड़ी वजहों में से एक हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ पुलिस अधिकारी उन पर दबाव बना रहे हैं उन्हें एफआईआर दर्ज करने का दवाब डाल कर डराया जा रहा हैं और स्विफ्ट गाड़ी के नुकसान की भरपाई के लिए करीब 2 लाख 25 हजार रुपये की मांग की जा रही है। उनका दावा है कि रकम अदा न करने की स्थिति में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी जा रही है।

थार मालिक का कहना है कि यदि उनके साथ अन्याय किया गया तो वह जल्द ही प्रशासन के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और पूरे मामले को सरकार तथा जनता के सामने रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रैफिक विभाग की लापरवाही के कारण हादसा हुआ, लेकिन अब पुलिस अधिकारी अपने मुलाजिम का पक्ष लेकर मुझ पर दबाव बना रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन के साथ अन्याय किया गया तो वह पूरा मामला ह्यूमन राइट्स के समक्ष भी उठाएंगे और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले में डीएसपी मंजीत सिंह की तरफ से थार चालक को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उनका कहना है कि ट्रैफिक सिग्नल बंद होने की स्थिति में चालक को चारों दिशाओं से आने वाले वाहनों और ट्रैफिक की स्थिति का पूरी तरह आकलन करने के बाद ही चौक पार करना चाहिए था। उन का कहना हैं कि ग्रीन सिग्नल होने पर ही स्विफ्ट कार चालक चौक पार कर रहा था।

हालांकि अब इस मामले में एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है कि वाहन चलाते समय कोई चालक चौक पर लगी सभी दिशाओं की ट्रैफिक लाइट्स को एक साथ कैसे जांच सकता है। जिस तरफ जाना होता हैं उसी तरफ की लाइट् को ही कार चालक हमेशा देखते हैं और आगे बढ़ते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चौक पार करते समय दूसरी दिशा से आ रहे वाहनों पर नजर रखना आवश्यक होता है, लेकिन यह जिम्मेदारी केवल एक पक्ष की नहीं बल्कि दोनों चालकों की बनती है।

शहर में इस घटना को लेकर चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि यदि ट्रैफिक सिग्नल समय पर दुरुस्त कर दिए गए होते तो शायद यह हादसा कभी नहीं होता। कई लोगों का मानना है कि दुर्घटना की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ ट्रैफिक विभाग की जिम्मेदारी और लापरवाही की भी गहन जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

A police employee’s Swift car—lacking insurance and featuring tinted windows—met with an accident