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दिल्ली से अमृतसर तक का सफर सिर्फ 2.5 घंटे में? जानिए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की पूरी सच्चाई

नई दिल्ली: दिल्ली और अमृतसर के बीच प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शुरुआती योजना और तकनीकी रिपोर्टों के अनुसार, यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दोनों प्रमुख शहरों के बीच यात्रा के समय को घटाकर करीब 2 से ढाई घंटे कर सकता है, जबकि वर्तमान में सबसे तेज पारंपरिक ट्रेनों से भी यह सफर तय करने में लगभग 6 घंटे का समय लग जाता है। हालांकि, कागजी दावों और उत्साह के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जमीनी हकीकत यह है कि 1 अक्टूबर 2026 तक यह कोई आधिकारिक रूप से स्वीकृत (Sanctioned) परियोजना नहीं है और न ही सरकार की ओर से इसके निर्माण शुरू होने या पूरा होने की कोई आधिकारिक तारीख तय की गई है।

दिल्ली से चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर को जोड़ने का खाका
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को पंजाब के प्रमुख औद्योगिक व धार्मिक केंद्रों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से जोड़ना है। प्रस्तावित योजना में दिल्ली-चंडीगढ़-लुधियाना-जालंधर-अमृतसर रूट शामिल किया गया है। चूंकि अभी तक इस रूट का अंतिम अलाइनमेंट, स्टेशनों की कुल संख्या, ट्रेनों के ठहराव (स्टॉपेज पैटर्न) और समय सारिणी को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए 2 से 2.5 घंटे का समय केवल एक प्रस्तावित अनुमान है, न कि कोई निर्धारित ट्रेन शेड्यूल। यदि भविष्य में इसे मंजूरी मिलती है, तो पारंपरिक ट्रेनों के मुकाबले यात्रियों का सफर आधे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा।

जालंधर और लुधियाना के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
पंजाब के औद्योगिक दिल कहे जाने वाले लुधियाना और दोआबा के केंद्र जालंधर के लिए यह परियोजना बेहद रणनीतिक महत्व रखती है। यदि यह प्रोजेक्ट तय अलाइनमेंट के साथ धरातल पर उतरता है, तो जालंधर को दिल्ली, चंडीगढ़, लुधियाना और अमृतसर के साथ सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिल जाएगी। हालांकि, मौजूदा चरण में दिल्ली और जालंधर के बीच की सटीक यात्रा अवधि तय नहीं की जा सकती, क्योंकि यह ट्रेनों के स्टॉपेज और ट्रैक के अंतिम रूट पर निर्भर करेगा। इसके साथ ही अमृतसर आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और व्यापारिक वर्ग को भी तेज और सुगम यात्रा का बड़ा विकल्प मिल सकता है।

एनएचएसआरसीएल कर चुका है सर्वे, लेकिन बजट 2026 की प्राथमिक सूची से बाहर
हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को विकसित करने वाली सरकारी एजेंसी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इस प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए पिछले कुछ वर्षों में प्राथमिक सर्वेक्षण और अलाइनमेंट से जुड़े काम किए हैं। लेकिन किसी भी हाई-स्पीड प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) की अंतिम मंजूरी, तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता, फंड का आवंटन, भूमि अधिग्रहण, वैधानिक मंजूरियां और टेंडर प्रक्रिया जैसे कई कड़े चरणों को पार करना होता है।

इस परियोजना की वर्तमान स्थिति का सबसे बड़ा संकेत 1 फरवरी 2026 को पेश केंद्रीय बजट 2026-27 में देखने को मिला। केंद्र सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की, जिनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन सातों स्वीकृत कॉरिडोरों की सूची में दिल्ली-अमृतसर रूट को शामिल नहीं किया गया था। रेल मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी परियोजना को मंजूरी देना उसकी व्यवहार्यता रिपोर्ट और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

निर्माण और शुरुआत की कोई तारीख तय नहीं, फिलहाल सिर्फ प्रस्ताव
कुल मिलाकर वर्तमान में दिल्ली-अमृतसर बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पूरी तरह से प्लानिंग और विचार-विमर्श के प्राथमिक चरण में अटका हुआ है। इसके निर्माण की शुरुआत या उद्घाटन को लेकर किसी वर्ष या तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। पंजाब और जालंधर के निवासियों के लिए बुलेट ट्रेन का सपना भविष्य में बेहद क्रांतिकारी साबित हो सकता है, लेकिन जब तक इसे औपचारिक कैबिनेट मंजूरी, ठोस बजट और निर्माण की हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक दो से ढाई घंटे में दिल्ली पहुंचने का दावा केवल एक सुखद प्रस्ताव ही बना रहेगा।

A journey from Delhi to Amritsar in just 2.5 hours? Know the full truth about the bullet train project