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पंजाब के शहरों में ट्रैवल टाइम कम, जेब पर भी हल्का बोझ; सर्वे में सामने आई बड़ी तस्वीर

चंडीगढ़: पंजाब के शहरों में नौकरीपेशा लोगों को अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम समय लग रहा है। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी ‘हाउसहोल्ड ट्रेवल सर्वे’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के शहरी क्षेत्रों में लोगों को दफ्तर पहुंचने में औसतन महज 20 मिनट का समय लगता है। यह आंकड़ा न केवल राष्ट्रीय औसत (27 मिनट) से काफी बेहतर है, बल्कि पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की तुलना में भी काफी सुखद स्थिति दर्शाता है।

देश भर में दोपहिया वाहन पहली पसंद, शहरों में 52% से अधिक निर्भरता
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में कामकाजी वर्ग के लिए दोपहिया वाहन आवाजाही का सबसे प्रमुख साधन बने हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 42.6 प्रतिशत कर्मचारी प्रतिदिन कार्यालय आने-जाने के लिए स्कूटर या बाइक का इस्तेमाल करते हैं। इनमें शहरी इलाकों के 52.3 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों के 37.1 प्रतिशत कामकाजी लोग शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुलभ सार्वजनिक व निजी परिवहन विकल्पों और अपेक्षाकृत बेहतर सड़क नेटवर्क के चलते पंजाब के शहरों में जाम की स्थिति बड़े महानगरों जैसी विकराल नहीं है। हालांकि लुधियाना, जालंधर और मोहाली जैसे औद्योगिक केंद्रों में ट्रैफिक का दबाव बढ़ा है, फिर भी समग्र स्थिति पड़ोसी राज्यों से काफी बेहतर बनी हुई है।

पड़ोसी राज्यों से तुलना: हरियाणा में 27 तो हिमाचल में लगते हैं 25 मिनट
रिपोर्ट के तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब के मुकाबले हरियाणा के शहरों में लोगों को कार्यस्थल पहुंचने में औसतन 27 मिनट लग रहे हैं। वहीं, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के शहरी इलाकों में यह समय औसतन 25-25 मिनट दर्ज किया गया है। पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कर्मचारी औसतन 22 मिनट में अपने कार्यस्थल पहुंच जाते हैं, जो कि 23 मिनट के राष्ट्रीय औसत से कम है। इसके विपरीत, हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में कर्मचारियों को 28 मिनट, उत्तराखंड में 27 मिनट और हिमाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में औसतन 31 मिनट का समय लगता है।

दफ्तर आवाजाही का मासिक खर्च भी पंजाब में सबसे कम
कम समय लगने के साथ-साथ पंजाब में दैनिक सफर पर होने वाला जेब खर्च भी पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी कम है। सर्वे के अनुसार, पंजाब में कार्यस्थल आने-जाने पर पुरुष कर्मचारी औसतन 975 रुपये और महिला कर्मचारी 809 रुपये प्रति माह खर्च करती हैं। इसके उलट, हरियाणा में पुरुषों का मासिक आवाजाही खर्च 1,221 रुपये और महिलाओं का 1,129 रुपये बैठता है। जम्मू-कश्मीर में पुरुष औसतन 1,216 रुपये और महिलाएं 855 रुपये प्रति माह यात्रा पर खर्च कर रही हैं।

23 मिनट में स्कूल-कॉलेज पहुंच रहे छात्र, हिमाचल में सबसे ज्यादा समय
सर्वेक्षण में छह वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थियों के स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों तक पहुंचने के सफर का भी व्यापक आकलन किया गया है। पंजाब में विद्यार्थी औसतन 23 मिनट में अपने शिक्षण संस्थान पहुंच जाते हैं, जो कि 22 मिनट के राष्ट्रीय औसत के बेहद करीब है। वहीं हरियाणा में छात्रों को 24 मिनट और उत्तराखंड में 23 मिनट का समय लगता है। हिमाचल प्रदेश में भौगोलिक विषमताओं और कई इलाकों में संस्थानों की अत्यधिक दूरी के कारण विद्यार्थियों को स्कूल या कॉलेज पहुंचने में औसतन 31 मिनट का लंबा समय लग रहा है।

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