चंडीगढ़: नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (NCSC) के कड़े निर्देशों के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने फिरोजपुर स्थित वेरका मिल्क प्लांट के जनरल मैनेजर (GM) डॉ. सुरजीत सिंह भदौड़ की शिकायत पर परविंदर सिंह और गुरबिंदर सिंह के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह पूरा मामला डॉ. भदौड़ के साथ जातिगत उत्पीड़न, सार्वजनिक रूप से छवि धूमिल करने, उनकी नौकरी को नुकसान पहुंचाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिशों और हाल ही में उन पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ा है।
1.11 करोड़ के गबन का लगाया था झूठा आरोप
डॉ. सुरजीत सिंह भदौड़ ने 31 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में औपचारिक प्रतिवेदन दिया था। शिकायत में उन्होंने बताया कि लुधियाना और पटियाला मिल्क प्लांट में जीएम के पद पर तैनाती के दौरान उन्हें जातिसूचक टिप्पणियों और दुर्भावनापूर्ण उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। डॉ. भदौड़ के मुताबिक, 19 जुलाई 2024 को चंडीगढ़ के किसान भवन में वेरका मिल्क प्लांट लुधियाना के तत्कालीन निलंबित निदेशक गुरबिंदर सिंह और मिल्क प्लांट मोहाली के पूर्व चेयरमैन परमिंदर सिंह चलाकी ने किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल की अगुवाई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन पर वर्ष 2012-13 के दौरान लुधियाना प्लांट से लगभग 1.11 करोड़ रुपये के वित्तीय गबन के झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए गए थे।
विभागीय जांच और स्पेशल ऑडिट में मिल चुकी थी क्लीन चिट
डॉ. भदौड़ ने आयोग के समक्ष तथ्य पेश करते हुए बताया कि पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन लिमिटेड (मिल्कफेड) से जुड़े प्लांट्स और इकाइयों की विभागीय जांच और विशेष ऑडिट पहले ही कराया जा चुका है। इस गहन जांच में उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता नहीं पाई गई थी और उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त पाया गया था। आयोग ने 12 सितंबर 2025 की सुनवाई में पाया कि दोनों आरोपियों ने जानबूझकर सार्वजनिक मंच से झूठे आरोप लगाकर डॉ. भदौड़ को अपमानित किया था। इसके बाद आयोग ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(r) और बीएनएस की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।
पुलिस ने बंद कर दी थी फाइल, 1 सितंबर को हुआ जानलेवा हमला
आयोग की सिफारिश के बावजूद चंडीगढ़ पुलिस ने शुरुआत में प्रेस कॉन्फ्रेंस की रिकॉर्डिंग की जांच का हवाला देते हुए कहा था कि इसमें कोई जातिसूचक शब्द नहीं मिला, लिहाजा एससी/एसटी एक्ट का मामला नहीं बनता। कानूनी राय के आधार पर पुलिस ने मामले की फाइल बंद कर दी थी। लेकिन 15 सितंबर 2026 को हुई आयोग की अगली सुनवाई में चौंकाने वाला मोड़ आया। आयोग ने पाया कि न केवल पुरानी सिफारिशों की अनदेखी की गई, बल्कि पीड़ित अधिकारी का बयान तक दर्ज नहीं किया गया। इसी बीच आयोग को सूचित किया गया कि 1 सितंबर 2026 को डॉ. भदौड़ पर अज्ञात हमलावरों द्वारा बर्बरतापूर्वक जानलेवा हमला किया गया, जिसके बाद वे अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
सेक्टर 36 थाने में गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
आयोग की सख्त फटकार के बाद 25 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ के सेक्टर 36 पुलिस स्टेशन में परविंदर सिंह और गुरबिंदर सिंह के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(u) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आयोग ने आदेश दिया है कि अस्पताल में भर्ती डॉ. भदौड़ का बयान तुरंत दर्ज किया जाए, मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच हो और उन्हें पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इसके साथ ही आयोग ने कर्तव्य में लापरवाही बरतने और कार्रवाई न करने वाले पूर्व जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत विभागीय व कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करते हुए पुलिस से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की है।


Case of misbehavior and assault on Verka GM: Chandigarh Police registers FIR following strict orders from the NCSC




