नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) को वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मिलने वाले राजनीतिक चंदे में 68 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग (ECI) को सौंपे गए आधिकारिक वार्षिक ऑडिट और चंदा दस्तावेजों के अनुसार, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी को वर्ष 2025-26 में कुल ₹12.10 करोड़ का चंदा मिला। इसमें सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई है कि पार्टी के कुल चंदे का लगभग 83 फीसदी हिस्सा केवल दो दाताओं- ट्राइडेंट ग्रुप और प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है।
कुल ₹12.10 करोड़ में से ₹10 करोड़ सिर्फ दो दाताओं से मिले
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्राइडेंट लिमिटेड (Trident Limited) ने आम आदमी पार्टी को ₹5 करोड़ का चंदा दिया, जो कुल घोषित राशि का 41 फीसदी से अधिक बैठता है। इसके अलावा ₹5 करोड़ की दूसरी सबसे बड़ी राशि प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से प्राप्त हुई। ट्राइडेंट ग्रुप के संस्थापक और तत्कालीन आप नेता राजेंद्र गुप्ता ने 9 जनवरी 2026 को इस ₹5 करोड़ के चेक पर हस्ताक्षर किए थे। गौरतलब है कि राजेंद्र गुप्ता अक्टूबर 2025 में ‘आप’ के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद में अप्रैल 2026 में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए और वर्तमान में पंजाब से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेजों में गुप्ता के चंदे और उनके बाद के राजनीतिक पाला बदलने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं दर्शाया गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका भी प्रमुख दानदाताओं में
दानदाताओं की सूची में एक और प्रमुख नाम आशुतोष रांका का है, जो उस समय आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे और बाद में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक बने। इसके अतिरिक्त चंदा सूची की 1,202 प्रविष्टियों में पार्टी के शीर्ष नेताओं के योगदान का भी ब्योरा है। ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ₹10,000 की तीन किस्तों में कुल ₹30,000 का योगदान दिया। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने ₹3,500 की 12 मासिक किस्तों के जरिए ₹42,000 और पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने ₹10,000 की 12 किस्तों में कुल ₹1.20 लाख पार्टी फंड में जमा कराए।
दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद फंडिंग पर सीधा असर
वित्तीय वर्ष 2024-25 में ‘आप’ को कुल ₹38.10 करोड़ का चंदा मिला था, जो 2025-26 में 68% घटकर महज ₹12.10 करोड़ रह गया। इससे पहले 2023-24 में पार्टी को ₹11.06 करोड़ मिले थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फरवरी 2025 में दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी की कॉरपोरेट और निजी फंडिंग पर सीधा असर पड़ा है, हालांकि पंजाब में पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार अभी भी बरकरार है। चुनाव आयोग को दी गई यह रिपोर्ट उस राजनीतिक दौर का आईना दिखाती है जब सत्ता परिवर्तन के साथ ही पार्टी के वित्तीय स्रोतों में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिली।


AAP sees a massive 68% drop in donations; Trident Group and Prudent Trust contributed 83% of the funds




