वॉशिंगटन: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को नेस्तनाबूत करने के लिए अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों ने मिलकर एक बहुत बड़ा ज्वाइंट ऑपरेशन शुरू किया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद दुनिया के अलग-अलग देशों से बिश्नोई गैंग और अन्य सिंडिकेट्स के 24 संदिग्धों को दबोचा जा चुका है। इसी कड़ी में अब बिश्नोई गैंग के एक बेहद शातिर और कथित मुख्य सदस्य गरिंदर देव को फ्रांस से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह वही आरोपी है जो मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे पर हुई फायरिंग की सनसनीखेज वारदात में शामिल था।
फ्रांस में कैसे फंसा बिश्नोई गैंग का ‘डॉक्टर’?
कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के अनुसार, 40 वर्षीय गरिंदर देव को फ्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों की मदद से धर-दबोचा गया है। अब उसे सख्त प्रत्यर्पण (Extradition) प्रक्रिया के तहत कनाडा वापस लाया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि गरिंदर देव का नाम अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट और आरोपपत्र में भी शामिल था। अपराध की दुनिया में गरिंदर देव को ‘रिट्ज कार्लटन’, ‘रॉकेट’ या ‘डॉक्टर’ जैसे कोड नेम से पुकारा जाता था। वह विदेशों में बैठकर बिश्नोई गैंग की फंडिंग को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी का नेटवर्क चला रहा था।
100 किलो कोकीन और हेरोइन की तस्करी का था मास्टरप्लान
अमेरिकी जांच एजेंसी DoJ के चौंकाने वाले खुलासे के मुताबिक, गरिंदर देव बड़े पैमाने पर कोकीन और हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई करता था। उसने जून 2025 में ही करीब 100 किलोग्राम कोकीन और एक किलोग्राम हेरोइन की एक बहुत बड़ी खेप को कैलिफोर्निया और पूर्वी अमेरिका के बाजारों तक पहुंचाने का एक खतरनाक मास्टरप्लान तैयार किया था। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस खेप को बॉर्डर पर ही जब्त कर लिया था। इसके अलावा, कपिल शर्मा कैफे फायरिंग मामले में शामिल एक अन्य आरोपी जशनदीप सिंह को भी कनाडा से डिपोर्ट करने का अंतिम आदेश जारी हो चुका है। जशनदीप सिंह पर कैफे के बाहर फायरिंग में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियारों को छिपाने में मदद करने का गंभीर आरोप है, जो साल 2022 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा भागा था।
दाऊद इब्राहिम की तर्ज पर ‘डीसेंट्रलाइज्ड मॉडल’ से चलता है गैंग
अमेरिकी जांच एजेंसियों की गहराई से की गई तफ्तीश में बिश्नोई गैंग के काम करने के अनोखे और बेहद खतरनाक तरीके का पता चला है। यह गैंग किसी एक जगह से नहीं, बल्कि एक हाइब्रिड या ‘डीसेंट्रलाइज्ड मॉडल’ पर काम करता है। इसके मुख्य सिंडिकेट लीडर एक देश में नहीं रहते, बल्कि दुनिया के अलग-अलग कोनों में बैठकर भारत में मौजूद अपने शूटर्स को मोबाइल और इंटरनेट के जरिए हैंडल करते हैं। इन शार्पशूटर्स की भर्तियां मुख्य रूप से हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के दूरदराज के गांवों से की जाती हैं। शुरुआत में इन युवाओं को छोटे-मोटे आपराधिक काम सौंपे जाते हैं, और जैसे ही ये स्थानीय पुलिस की नजरों में आते हैं, वैसे ही गैंग के आका इनका फर्जी पासपोर्ट बनवाकर या फिर अवैध ‘डोंकी रूट’ के जरिए इन्हें रातों-रात अमेरिका, कनाडा या यूरोपीय देशों में सुरक्षित पहुंचा देते हैं।
अमेरिकी रडार पर भारत के 3 बड़े गैंग, 11 की तलाश जारी
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के साथ-साथ भारत से जुड़े दो अन्य बड़े आपराधिक गैंगों के खिलाफ भी एक साथ तगड़ा मोर्चा खोलते हुए भारी-भरकम आरोप पत्र दाखिल किया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन गैंग्स के खिलाफ धरपकड़ का अभियान बेहद तेज हो गया है। अमेरिका द्वारा जारी की गई इस ब्लैकलिस्टेड चार्जशीट में कुल 36 बड़े अपराधियों के नाम शामिल थे, जिनमें से अब तक 25 खूंखार बदमाशों को अलग-अलग देशों की पुलिस सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जबकि बचे हुए 11 अन्य वांटेड अपराधियों की तलाश में दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां दिन-रात छापेमारी कर रही हैं।


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