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कनाडा-अमेरिका में कैसे फैला लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया का खौफ? US की रिपोर्ट में हुए होश उड़ाने वाले खुलासे

चंडीगढ़: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के अपराध का दायरा भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी तेजी से फैला है। कभी एक-दूसरे के साथी रहे इन दोनों गैंगस्टर्स ने अपने आपराधिक नेटवर्क को बढ़ाने के लिए एक ही तरीके का इस्तेमाल किया। इन सिंडिकेट्स ने अपने अवैध कामों को अंजाम देने के लिए महिलाओं और मासूम नाबालिगों को अपना मोहरा बनाया। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) के दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन गैंग्स ने कैसे विदेश की धरती पर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दिया।

नाबालिगों और महिलाओं को बनाया मोहरा

वर्तमान में गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई ने पंजाब के गरीब और पिछड़े इलाकों से नाबालिगों को अपने गैंग में शामिल किया। अमेरिकी रिकॉर्ड के अनुसार, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पकड़े जाने पर जुवेनाइल (नाबालिगों) को कानून के तहत कम सजा मिलती है। बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर आकर्षक वीडियो और संदेशों के जरिए इन युवाओं को पैसे, शोहरत और सुरक्षा का लालच दिया। हालांकि, अदालत के रिकॉर्ड बताते हैं कि भर्ती होने के बाद इन नए सदस्यों को गैंग के लिए किए गए खतरनाक अपराधों के बदले बहुत ही कम पैसे दिए जाते थे। वहीं, दूसरी तरफ असम की सिलचर सेंट्रल जेल में बंद जग्गू भगवानपुरिया के गैंग ने भी ऐसे ही हथकंडे अपनाए। रिकॉर्ड बताते हैं कि भगवानपुरिया गैंग ने अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी के लिए मनदीप कौर उर्फ चीमा नाम की एक महिला का भरपूर इस्तेमाल किया था।

महज 20 हजार रुपये में हत्या और पुलिस की मिलीभगत

लॉस एंजिल्स में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) के ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत 44 पन्नों की एक संघीय चार्जशीट में कई खौफनाक बातें सामने आई हैं। इसमें बताया गया है कि भारत के कुछ हिस्सों में भगवानपुरिया गैंग अपने गुर्गों को हत्या करने के लिए मात्र 20,000 रुपये तक का भुगतान करता था। सबसे हैरान करने वाली बात इस चार्जशीट में भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों की कथित संलिप्तता का जिक्र है। होशियारपुर के टांडा पुलिस स्टेशन के पूर्व एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा पर आरोप है कि उन्होंने गैंगस्टर्स के साथ मिलकर पंजाब में रहने वाले रिश्तेदारों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर लॉस एंजिल्स के एक परिवार से चार लाख डॉलर की भारी-भरकम रंगदारी मांगी थी। इस खुलासे के बाद नागरा को पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

फर्जी वीजा पर विदेश भेजे गए गुर्गे

अमेरिकी दस्तावेजों से बिश्नोई सिंडिकेट के काम करने के तरीके की भी पूरी जानकारी मिलती है। गैंग के वफादार सदस्यों को अक्सर फर्जी तरीके से हासिल किए गए स्टूडेंट या वर्कर वीजा पर विदेश भेजा जाता था, ताकि वे अमेरिका और कनाडा में गैंग के काले कारोबार को संभाल सकें। जेल में बंद होने के बावजूद बिश्नोई ने इस पूरे नेटवर्क को अपने लेफ्टिनेंट और क्षेत्रीय नेताओं को सौंप रखा था। इसमें उसका बचपन का दोस्त सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ उत्तरी अमेरिका का काम संभालता था, जबकि रोहित गोदारा यूरोप का पूरा नेटवर्क देखता था। चार्जशीट में बताया गया है कि इस गिरोह के सदस्यों ने अमेरिका में कोकीन, मेथामफेटामाइन और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की जमकर तस्करी की और यहां तक कि अपने प्रतिद्वंद्वी तस्करों की खेप भी लूट ली। इस काले कारोबार से होने वाले भारी मुनाफे को गैंग के सदस्यों के बीच बांटा जाता था और भारत वापस भेजा जाता था।

विदेशी खुफिया एजेंसियां भी हुईं अलर्ट

लॉरेंस बिश्नोई और दूसरे गैंग्स की इन बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को देखते हुए विदेशी एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। इसी साल अप्रैल में, कनाडा की वित्तीय खुफिया एजेंसी (FINTRAC) ने एक विशेष बुलेटिन जारी कर बड़ी चेतावनी दी थी। बुलेटिन में बताया गया था कि ये गैंग्स स्टडी परमिट पर वहां गए आर्थिक रूप से कमजोर भारतीय छात्रों को डरा-धमका कर अपने गैंग में शामिल कर रहे हैं और उनसे हिंसक घटनाएं करवा रहे हैं। इस बुलेटिन में बिश्नोई और उसके विरोधी बंबीहा गैंग को इस तरह की बढ़ती हिंसा का मुख्य कारण बताया गया था। इसी अंतरराष्ट्रीय खतरे को देखते हुए कनाडाई सरकार ने 29 सितंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर बिश्नोई गैंग को एक सूचीबद्ध आतंकवादी संगठन (टेररिस्ट एंटिटी) घोषित कर दिया था।

How did the terror of Lawrence Bishnoi and Jaggu Bhagwanpuria spread across Canada and the US