लुधियाना: लुधियाना सेंट्रल जेल के अंदर की व्यवस्था एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। जेल में बंद 19 वर्षीय हवालाती (अंडरट्रायल) अर्शदीप सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक की मां ने जेल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मां का सीधा कहना है कि उनके बेटे की मौत किसी प्राकृतिक बीमारी से नहीं, बल्कि जेल अधिकारियों की घोर लापरवाही और समय पर इलाज न मिलने के कारण हुई है। इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और पुलिस को मामले की गहराई से जांच के लिए एफआईआर दर्ज करनी पड़ी है।
POCSO एक्ट के तहत जेल में बंद था अर्शदीप
पटियाला जिले के सुलर घराट (झुंगोपत्ती) की रहने वाली सरबजीत कौर का 19 साल का बेटा अर्शदीप इसी साल 22 मार्च 2026 से लुधियाना सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में था। उसके खिलाफ थाना दाखा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 64 और पोक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस को दिए बयान में मृतक की मां सरबजीत कौर ने बताया कि 3 जुलाई 2026 को जेल में अचानक अर्शदीप की तबीयत खराब हो गई थी। हालत ज्यादा बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने आनन-फानन में उसे लुधियाना के सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान कुछ ही घंटों में उसने दम तोड़ दिया। अगले दिन 4 जुलाई को इलाका मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम करवाकर अंतिम संस्कार के लिए परिवार को सौंप दिया गया।
‘जेल प्रशासन की अनदेखी ने ली मेरे जवान बेटे की जान’
अपने 19 साल के जवान बेटे का शव देखकर मां सरबजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के सामने अपना दर्द बयां करते हुए सीधा आरोप लगाया है कि जेल प्रशासन की अनदेखी ने उनके बेटे को मौत के मुंह में धकेल दिया। परिवार का स्पष्ट तौर पर कहना है कि अगर अर्शदीप को जेल के अंदर ही समय रहते उचित मेडिकल सुविधा मिल जाती और लापरवाही न बरती जाती, तो आज वह जिंदा होता। मां का आरोप है कि जेल वालों ने जानबूझकर उनके बीमार बेटे पर ध्यान नहीं दिया और उसे मरने के लिए छोड़ दिया।
अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज, सच सामने लाने में जुटी पुलिस
मृतक की मां के इन बेहद गंभीर आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन भी तुरंत हरकत में आ गया है। लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर-7 की पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर नंबर 173 दर्ज कर ली है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस ने पूरे मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है और इस जांच की जिम्मेदारी सब-इंस्पेक्टर (एसआई) दिनेश कुमार को सौंपी गई है। अब पुलिस की तफ्तीश और मेडिकल रिपोर्ट्स में ही यह साफ हो पाएगा कि अर्शदीप की मौत के पीछे क्या वाकई जेल प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार है या सच्चाई कुछ और है।


Uproar over the death of a 19-year-old inmate in Ludhiana Central Jail; FIR registered.








