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जालंधर के इस स्कैनिंग सेंटर की एक छोटी सी मिस्टेक ने करवा दिया गर्भवती का तलाक! वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

जालंधर: कपूरथला चौक स्थित एक स्कैनिंग सेंटर की भारी लापरवाही ने एक गर्भवती महिला की हंसती-खेलती जिंदगी में तूफान ला दिया है। सेंटर की महज एक छोटी सी टाइपिंग मिस्टेक के कारण महिला का घर टूटने की कगार पर पहुंच गया है। दरअसल, महिला ने साल 2026 में अपना अल्ट्रासाउंड करवाया था, लेकिन स्कैनिंग सेंटर ने रिपोर्ट पर गलती से साल 2010 लिख दिया। जब यह रिपोर्ट विदेश में बैठे पति के पास पहुंची, तो उसने पत्नी के चरित्र पर शक करते हुए उसे अपनाने से ही इनकार कर दिया। मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस सेंटर ने कथित तौर पर गर्भ में पल रहे बच्चों का लिंग भी बता दिया था।

16 साल पुरानी रिपोर्ट देख भड़का पति, ससुराल वालों ने घर से निकाला

विदेश में रह रहे पति ने जब अपनी पत्नी की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखी तो वह आगबबूला हो गया। पति का सीधा सवाल था कि 16 साल पुरानी (2010 की) रिपोर्ट अब कैसे सामने आ रही है। इस गलत तारीख को आधार बनाते हुए पति ने पत्नी को झूठा करार दे दिया, उसका खर्चा पानी बंद कर दिया और तलाक तक की धमकी दे डाली। विवाद इतना बढ़ गया कि ससुराल वालों ने भी गर्भवती महिला को घर से बेदखल कर दिया है और वह अब अपनी मौसी के घर पनाह लेने को मजबूर है।

डॉक्टरों ने अपनी गलती मानने की बजाय महिला को ही ठहराया दोषी

पीड़ित महिला का आरोप है कि जब वह अपनी रिपोर्ट ठीक करवाने के लिए वापस उस स्कैनिंग सेंटर पहुंची, तो वहां के डॉक्टरों का रवैया बेहद संवेदनहीन रहा। अपनी इस गंभीर गलती को सुधारने के बजाय डॉक्टरों ने उल्टा महिला को ही प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। परिजनों के मुताबिक, सेंटर के डॉक्टरों ने महिला पर ही पैसे देकर गलत रिपोर्ट बनवाने का बेतुका आरोप मढ़ दिया और उसके पति को ‘अनपढ़’ बताकर अपनी गलती पर पर्दा डालने की कोशिश की।

लिंग जांच का भी गंभीर आरोप, PNDT एक्ट की उड़ी धज्जियां

इस पूरे मामले में एक और बेहद संगीन आरोप सामने आया है। पीड़ित महिला ने बताया कि स्कैनिंग सेंटर ने सभी नियमों और कानूनों को ताक पर रखते हुए उसे गर्भ में पल रहे बच्चों का लिंग (एक लड़का और एक लड़की) भी बता दिया था। भारत में पीएनडीटी (PNDT) एक्ट के तहत गर्भ में लिंग की जांच करना और उसे उजागर करना एक संगीन अपराध है। इस खुलासे के बाद कपूरथला चौक स्थित इस स्कैनिंग सेंटर की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।

लाइसेंस रद्द करने की मांग पर अड़ा परिवार, सिविल सर्जन से होगी शिकायत

मामले की भनक लगते ही शिव सेना समाजवादी के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और पीड़ित महिला को हर संभव इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया। संगठन ने साफ कर दिया है कि वे इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिले के सिविल सर्जन से करेंगे। पीड़ित परिवार और संगठन की मांग है कि इस स्कैनिंग सेंटर का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर इसे सील किया जाए। हालांकि, जब विवाद बढ़ने लगा तो सेंटर प्रबंधन बैकफुट पर आ गया और अपनी गलती मानते हुए दोबारा स्कैन करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन पीड़ित परिवार अब कड़ी कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग पर अड़ा हुआ है।