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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय ट्रक ड्राइवरों पर नस्लीय हमले और मौत की धमकियां, खौफ में काम कर रहे लोग- देखें VIDEO

सिडनी: ऑस्ट्रेलिया में काम कर रहे भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवरों ने वहां फैले नस्लवाद और कार्यस्थल पर होने वाले भेदभाव को लेकर अपना दर्द बयां किया है। ‘एबीसी न्यूज’ (ABC News) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के माल ढुलाई (फ्रेट) उद्योग में काम करने वाले इन ड्राइवरों को लगातार नस्लीय दुर्व्यवहार, गालियों और यहां तक कि जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि ऐसा तब हो रहा है, जब ऑस्ट्रेलिया भारी वाहन ड्राइवरों की कमी से जूझ रहा है और इस किल्लत को पूरा करने के लिए प्रवासी मजदूरों पर ही निर्भर है।

‘फोन पर पंजाबी में बात की तो मेरे ऊपर थूका’

कई ड्राइवरों ने एबीसी न्यूज के साथ अपने भयावह अनुभव साझा किए हैं। अपना खुद का ट्रकिंग फ्लीट चलाने वाले दो बच्चों के पिता जसविंदर बोपराई ने बताया कि साउथ ऑस्ट्रेलिया के एक ट्रक स्टॉप पर जब वह अपनी पत्नी से फोन पर पंजाबी में बात कर रहे थे, तो किसी ने उन पर थूक दिया। उन्होंने कहा, “वह इतना अपमानजनक था कि मैं उसे कभी नहीं भूल सकता।” वहीं, न्यूजीलैंड में एक दशक तक ट्रक चलाने वाले नरिंदर सिंह ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में पगड़ी पहनने पर उनका मजाक उड़ाया गया और काम में छोटी-सी गलती होने पर ‘वापस जाओ’ जैसी नस्लीय टिप्पणियां की गईं। इस दुर्व्यवहार से तंग आकर उन्होंने आठ महीने में ही काम छोड़ दिया।

रेडियो पर मिलती हैं धमकियां, सोशल मीडिया पर बन रहे मीम्स

एक अन्य ट्रक ड्राइवर पिप्पल सिंह ने बताया कि ट्रक ड्राइवरों के बीच सड़क सुरक्षा की जानकारी साझा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सीबी (CB) रेडियो चैनलों पर भारतीयों के खिलाफ हिंसक धमकियां दी जाती हैं। गालियां और धमकियां इतनी आम हो गई हैं कि अब कई प्रवासी ड्राइवरों ने डर के मारे इन रेडियो चैनलों का इस्तेमाल ही बंद कर दिया है। इसके अलावा, सोशल मीडिया ग्रुप्स में भी दक्षिण एशियाई ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाते हुए नस्लवादी मीम्स शेयर किए जा रहे हैं, जिससे उनके लिए माहौल और भी ज्यादा खराब हो गया है।

28 हजार ड्राइवरों की कमी, फिर भी हो रहा दुर्व्यवहार

एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से आए लोग पिछले एक दशक में ऑस्ट्रेलिया में सबसे तेजी से बढ़ता प्रवासी समुदाय हैं। सिख और पंजाबी प्रवासियों का खेती और ट्रांसपोर्ट का पुराना बैकग्राउंड होने के कारण वे इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में फिलहाल 28,000 भारी वाहन ड्राइवरों की भारी कमी है, जिसे भारतीय मूल के लोग ही पूरा कर रहे हैं। वर्कप्लेस सेफ्टी विशेषज्ञ प्रोफेसर एलिजाबेथ एंडरसन का कहना है कि नस्लवाद ड्राइवरों की एकाग्रता को प्रभावित करता है जो इस पेशे के लिए बहुत खतरनाक है। ऑस्ट्रेलियन ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी माना है कि उसे जुलाई 2023 से अब तक ऐसी 12 शिकायतें मिली हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि भाषा की बाधाओं और न्याय की उम्मीद न होने के कारण बहुत कम ही ड्राइवर आधिकारिक तौर पर इसकी शिकायत दर्ज कराते हैं।

Racial attacks and death threats against Indian truck drivers in Australia; drivers working in fear