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‘आम आदमी का घर खरीदना हुआ नामुमकिन…’ ट्राईसिटी में आसमान छूती प्रॉपर्टी की कीमतों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकारों से मांगा जवाब

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) में सरकारी एजेंसियों द्वारा आवासीय प्लॉट और फ्लैट्स की लगातार बढ़ाई जा रही कीमतों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि जिस तरह से इन शहरों में नीलामी के जरिए प्लॉट और फ्लैट बेचे जा रहे हैं, उससे इनकी कीमतें इस कदर बढ़ गई हैं कि अब किसी भी आम कर्मचारी, नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के व्यक्ति के लिए यहां अपना घर खरीदना लगभग नामुमकिन हो गया है।

सरकारी एजेंसियों की मुनाफाखोरी वाली नीतियों पर उठे सवाल

सोमवार को इस अहम मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की बेंच ने पंजाब, हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन समेत संबंधित विकास एजेंसियों को कटघरे में खड़ा करते हुए उनसे जवाब तलब किया है। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि जिन सरकारी संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य ही आम लोगों को किफायती दरों पर सिर छुपाने की जगह उपलब्ध कराना था, आज उन्हीं की मुनाफा कमाने वाली नीतियों के कारण एक आम नागरिक के लिए अपने सपनों का आशियाना बनाना बेहद मुश्किल हो गया है। सुनवाई के दौरान पंजाब की तरफ से एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी और हरियाणा सरकार की तरफ से डिप्टी एडवोकेट जनरल अनंत कटारिया अदालत में पेश हुए।

करोड़ों में पहुंच रही नीलामी की कीमतें, आम आदमी रेस से बाहर

इस मामले में दायर की गई याचिका में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP), गमाडा (GMADA) और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड जैसी बड़ी एजेंसियों की आवासीय प्लॉटों और फ्लैटों की नीलामी प्रक्रिया पर सीधे तौर पर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने दलील दी कि इन एजेंसियों द्वारा तय की जा रही न्यूनतम बोली (बेस प्राइस) की कीमत ही इतनी ज्यादा होती है कि नीलामी के दौरान संपत्तियों के दाम करोड़ों रुपये तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में आम आदमी तो दूर, अच्छे खासे वेतन वाले पेशेवर भी इस दौड़ से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं।

ड्रॉ सिस्टम बंद होने से टूटा मिडिल क्लास का सपना

अदालत ने अपनी शुरुआती सुनवाई के दौरान एक बेहद अहम बिंदु पर गौर करते हुए पुरानी व्यवस्था को याद किया। अदालत ने कहा कि पहले यही सरकारी एजेंसियां आम जनता के लिए ‘ड्रॉ सिस्टम’ जैसी योजनाएं लेकर आती थीं और प्लॉट बांटती थीं। उस समय निकाली जाने वाली लॉटरी प्रणाली के जरिए मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को भी शहर में अपना घर मिलने का एक उचित अवसर मिलता था। लेकिन अब ज्यादातर आवासीय संपत्तियां सिर्फ नीलामी (ऑक्शन) के जरिए सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को बेची जा रही हैं। इस व्यवस्था ने आम आय वाले लोगों से ट्राईसिटी में घर खरीदने का सपना पूरी तरह से छीन लिया है।

‘It has become impossible for the common man to buy a house…’ The High Court has taken a tough stand