सिधवां कलां: केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से नाराज पंजाब के किसानों ने एक बार फिर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले एक सितंबर से चंडीगढ़ में होने वाले सात दिवसीय विशाल धरने को लेकर गांव-गांव में लामबंदी और तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में गांव सिधवां कलां में किरती किसान यूनियन ने एक विशेष और अहम बैठक कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। किसान नेता नेक सिंह और गुरजिंदरजीत सिंह की संयुक्त अध्यक्षता में हुई इस बैठक में किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अपने हक लिए बिना पीछे नहीं हटेंगे और बड़े आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
पानी के मुद्दे पर सरकार को घेरा, पंजाब के अधिकारों की अनदेखी का आरोप
बैठक के दौरान यूनियन की जिला कमेटी के सदस्य बलविंदर सिंह कोठे पोना और नरेंद्र सिंह निंदा ने पंजाब के दरियाई पानी पर राज्य के पहले और विशेष अधिकार का मुद्दा सबसे प्रमुखता से उठाया। किसान नेताओं ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि पंजाब के बेशकीमती पानी का लाभ तो गैर-वाजिब तरीके से अन्य राज्यों को लुटाया जा रहा है, लेकिन जब बाढ़ जैसी भयानक प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, तो उसका सारा आर्थिक और जानमाल का भारी नुकसान सिर्फ पंजाब के किसानों को ही झेलना पड़ता है। नेताओं ने इस सौतेले व्यवहार को लेकर भारी रोष प्रकट किया।
कर्ज माफी से लेकर एमएसपी तक, किसानों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
पानी के गंभीर मुद्दे के अलावा बैठक में किसानों और मजदूरों की बदहाल आर्थिक स्थिति पर भी लंबी चर्चा की गई। कृषि संकट से किसानों को उबारने के लिए नेताओं ने सरकार के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं। यूनियन की तरफ से मांग की गई है कि पंजाब पुनर्गठन एक्ट की धारा 78, 79 और 80 को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और पानी के तमाम विवादों को रिपेरियन सिद्धांत (Riparian Principle) के आधार पर हमेशा के लिए सुलझाया जाए। इसके साथ ही भाखड़ा डैम से निकलने वाला स्वच्छ पानी पंजाब के हर घर और खेत तक पहुंचाने, डैम सेफ्टी एक्ट को पूरी तरह से निरस्त करने और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने की जोरदार मांग उठी। किसानों ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सभी फसलों पर एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी दे, किसानों और खेत-मजदूरों का संपूर्ण कर्ज माफ करे और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को कृषि क्षेत्र के लिए नुकसानदेह बताते हुए तुरंत प्रभाव से रद्द करे।
एक सितंबर को चंडीगढ़ कूच की पुरजोर अपील, मोर्चे को मिला भारी समर्थन
अपनी इन्हीं अहम मांगों को सरकार से मनवाने के लिए यूनियन के नेताओं ने क्षेत्र के तमाम किसानों और मजदूरों से अपील की है कि वे एक सितंबर से चंडीगढ़ में लगने वाले सात दिवसीय मोर्चे में अपनी पूरी ताकत के साथ भारी संख्या में शामिल हों। इस निर्णायक बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य यूनियनों ने भी किसानों को अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। इस दौरान सरपंच शरणप्रीत सिंह, उपाध्यक्ष भूपिंदर सिंह, महासचिव मनप्रीत सिंह, वित्त सचिव सुरिंदर सिंह, हरदेव सिंह सीएम, रणधीर सिंह, पिंदर सिंह, जसपाल सिंह, जतिंदर लाली मंडीला और ग्रामीण मजदूर यूनियन के नेता कुलवंत सिंह सोनी सहित भारी संख्या में ग्रामीण और किसान उपस्थित रहे।


Farmers’ anger flares up again in Punjab; open warning issued to camp in Chandigarh starting September 1.




