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पंजाब CMO भ्रष्टाचार मामले में ED ने DGP को 3 बार लिखा पत्र, फिर भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, अब हाईकोर्ट ने CBI को भेजा नोटिस

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में नया और बड़ा मोड़ आ गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक बेहद अहम खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार से जुड़े पुख्ता सबूत साझा करते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक नहीं, बल्कि तीन बार पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। इसके बावजूद पंजाब पुलिस की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी नोटिस जारी कर दिया है।

ED ने DGP को कब-कब लिखे पत्र?
हाईकोर्ट में चल रही एक जनहित याचिका (PIL- 238/2026) की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह अहम जानकारी पेश की। केंद्र के मुताबिक, सीएमओ में कथित भ्रष्टाचार की जांच और साक्ष्य मिलने के बाद ED ने पंजाब पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा था। ED ने पहला पत्र 24 जुलाई 2026, दूसरा पत्र 30 जुलाई 2026 और तीसरा पत्र 7 अगस्त 2026 को पंजाब के DGP को भेजा था। इन पत्रों के साथ ED ने भ्रष्टाचार से जुड़ी अहम सामग्री और सबूत भी साझा किए थे और साफ तौर पर कानून के मुताबिक एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी।

पंजाब पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल, CBI की हुई एंट्री
अदालत में यह बात सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो गया है। अदालत ने हैरानी जताई कि जब एक केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) की ओर से राज्य पुलिस के मुखिया को बार-बार जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध करवाए जा रहे थे, तो पुलिस ने उस पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। इसी ढुलमुल रवैये को बेहद गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने अब इस मामले में CBI को भी पक्ष बनाते हुए नोटिस जारी कर दिया है। अगली सुनवाई में पुलिस और एजेंसियों से जवाब-तलब किया जाएगा, जिससे यह साफ होगा कि आखिर पुलिस ने किन वजहों से एफआईआर दर्ज करने में देरी की।

In the Punjab CMO corruption case, the ED wrote to the DGP three times, yet the police took no action