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जालंधर में अकेले पूरा स्कूल चला रही शिक्षिका की अनोखी पहल…जब बच्चे नहीं आते, तो खुद घर जाकर स्कूल लाती हैं

जालंधर: शिक्षा के प्रति समर्पण और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता की एक शानदार मिसाल जालंधर जिले के मियानी स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिल रही है। इस स्कूल में स्कूल की घंटी बजने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि टीचर ने क्लास शुरू कर दी है, बल्कि कई बार इसका मतलब उनका क्लास से बाहर निकलकर बच्चों को घर-घर जाकर स्कूल बुलाकर लाना भी होता है।

यह स्कूल पिछले कई सालों से ‘सिंगल-टीचर’ स्कूल यानी एक ही शिक्षिका के भरोसे चल रहा है। स्कूल में 37 बच्चे पढ़ते हैं और इस इकलौती शिक्षिका पर ही अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने, स्कूल का सारा रिकॉर्ड मेंटेन करने और अन्य सभी प्रशासनिक काम निपटाने की जिम्मेदारी है।

प्रवासी मजदूरों के बच्चों को पढ़ाना एक बड़ी चुनौती
इस स्कूल में शिक्षिका जसवीर कौर के लिए बच्चों को पढ़ाना और भी चुनौतीपूर्ण इसलिए है, क्योंकि यहां पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे प्रवासी मजदूर परिवारों से आते हैं। उनके माता-पिता काम की तलाश में दूसरे राज्यों से आकर यहां दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। माता-पिता सुबह ही काम पर चले जाते हैं, इसलिए वे बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते।

मिड-डे मील के जरिए बढ़ाती हैं बच्चों की उत्सुकता
मजदूर परिवारों की इस मजबूरी को जसवीर कौर ने कभी बच्चों की पढ़ाई में रुकावट नहीं बनने दिया। जब भी बच्चे स्कूल नहीं आते, तो वह खुद उनके घर जाती हैं और उन्हें स्कूल लेकर आती हैं। बच्चों को स्कूल के प्रति आकर्षित करने के लिए उन्होंने ‘मिड-डे मील’ (मध्याह्न भोजन) का एक अनोखा तरीका निकाला है। वह अक्सर बच्चों को बताती हैं कि आज स्कूल में खाने में क्या स्वादिष्ट बन रहा है और मेन्यू के बारे में उनसे बात करती हैं। भोजन को लेकर बच्चों की उत्सुकता और शिक्षिका के इन प्रयासों से बच्चे खुद-ब-खुद घर से निकलकर स्कूल आने को तैयार हो जाते हैं।

सिंगल-टीचर स्कूलों की समस्याएं हुईं उजागर
इस स्थिति ने सिंगल-टीचर स्कूलों के सामने आने वाली भारी दिक्कतों को भी उजागर किया है, जहां एक ही टीचर को पढ़ाई और प्रशासनिक कामों के बीच सामंजस्य बिठाना पड़ता है। हालांकि, इन तमाम चुनौतियों के बावजूद जसवीर कौर न केवल स्कूल चला रही हैं, बल्कि उन बच्चों को भी शिक्षा से जोड़े हुए हैं, जो शायद पढ़ाई से पूरी तरह दूर हो जाते। इस मामले पर उप शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार ने कहा है कि वह अधिकारियों को निर्देश देंगे कि मियानी गांव की पंचायत की मदद से इस स्कूल में गांव के ही किसी सहयोगी या अन्य शिक्षक की तैनाती की जाए।

A unique initiative by a teacher running an entire school single-handedly in Jalandhar