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क्या जंतर-मंतर के सच की वजह से हुई कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर की छुट्टी? पंजाब में रातों-रात हुए ट्रांसफर की इनसाइड स्टोरी

जालंधर: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है। इस बार विवाद का केंद्र कोई राजनेता नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर का अचानक हुआ ट्रांसफर है। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर को रातों-रात उनके वर्तमान पद से हटा दिया गया है, और इस एक फैसले ने राज्य में एक बड़े सियासी तूफान को जन्म दे दिया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि यह ट्रांसफर कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़े ‘सच’ को दबाने की कोशिश है।

जंतर-मंतर कनेक्शन और वह विवादित प्रेस कॉन्फ्रेंस

यह पूरा विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे छात्र प्रदर्शन से गहराई से जुड़ा हुआ है। दरअसल, तीन और चार अगस्त को अमृतसर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से पिस्तौल और पेट्रोल बम बरामद हुए थे। इस गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया था कि इन संदिग्धों के तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया था कि ये लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन में पेट्रोल बम फेंकने की खतरनाक साजिश रच रहे थे। इस बड़े खुलासे के कुछ ही समय बाद उन्हें अचानक पद से हटाकर डीजीपी ऑफिस रिपोर्ट करने का फरमान सुना दिया गया और उनकी जगह हरमनबीर सिंह को अमृतसर का नया पुलिस कमिश्नर बना दिया गया।

बीजेपी और कांग्रेस ने सरकार पर दागे तीखे सवाल

इस अप्रत्याशित ट्रांसफर के तुरंत बाद विपक्ष ने आम आदमी पार्टी की सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है। पंजाब बीजेपी के महासचिव परमिंदर बराड़ ने इस ट्रांसफर की टाइमिंग पर सबसे गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो अफसर अब तक सरकार का चहेता माना जाता था, उसे जंतर-मंतर की साजिश का पर्दाफाश करते ही क्यों हटा दिया गया। बीजेपी का सीधा आरोप है कि दिल्ली तक इस खुलासे की आंच पहुंचने के कारण ही यह कार्रवाई की गई है। वहीं, कांग्रेस भी इस मुद्दे पर हमलावर है। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने इस फैसले को पूरी तरह से अपारदर्शी बताते हुए मामले की गहन जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि आतंकवाद और साजिश का भंडाफोड़ करने वाले अफसरों को सजा देने के बजाय सरकार को उन्हें इनाम देना चाहिए था।

सरकार ने दी सफाई, रूटीन ट्रांसफर का दिया हवाला

विपक्ष के इन सभी गंभीर आरोपों के बीच सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने भी अपना बचाव किया है। पंजाब सरकार के मंत्री मोहिंदर भगत ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया करार दिया है। उनका कहना है कि पुलिस विभाग में अधिकारियों का ट्रांसफर एक बेहद सामान्य बात है। सरकार का तर्क है कि इससे पहले भी राज्य में कई अधिकारियों के ट्रांसफर हुए हैं और विपक्ष के पास जनता से जुड़ा कोई असली मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे एक रूटीन ट्रांसफर को बेवजह तूल देकर राजनीति कर रहे हैं। हालांकि, इन सफाईयों के बावजूद एक आईपीएस अधिकारी के खुलासे और उसके तुरंत बाद हुए ट्रांसफर ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब फिलहाल पंजाब की सियासत में तलाशा जा रहा है।

Did the truth about Jantar Mantar cost Commissioner Gurpreet Bhullar his post