चंडीगढ़: पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में बीते कल हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए ऐतिहासिक और जनहितैषी फैसलों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैबिनेट द्वारा पंजाब की तरक्की और आम जनता की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण एजेंडों को मंजूरी दी गई है।
चुनावी सूचियों के सुधार के बीच विभिन्न सर्टिफिकेट्स की फीस पूरी तरह माफ
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस समय पंजाब में भारतीय चुनाव आयोग द्वारा वोटर सूचियों के सुधार के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का काम चल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत आम नागरिकों को बीएलओ (BLO) या संबंधित अधिकारियों के पास कई तरह के दस्तावेज पेश करने पड़ते हैं। गरीब, ग्रामीण तबके और सीनियर सिटीजन्स को बड़ी आर्थिक राहत देते हुए सरकार ने फैसला किया है कि 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक रिहायशी प्रमाणपत्र (डोमीसाइल), जाति प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र और शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र बनाने के लिए ली जाने वाली फेसिलिटेशन फीस (सुविधा शुल्क) को पूरी तरह माफ (Wave Off) कर दिया गया है। गौरतलब है कि पहले सरकार द्वारा दी जा रही 120 डोर-स्टेप डिलीवरी सेवाओं के लिए 70 रुपये और अन्य के लिए 50 रुपये फीस ली जाती थी, जो अब इन तीन महीनों के लिए बिल्कुल मुफ्त होगी।
लैंड एक्विजिशन (भूमि अधिग्रहण) पॉलिसी में बड़ा संशोधन
सूबे के भीतर विकास कार्यों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के मालिकों (किसानों और हिस्सेदारों) को बड़ा लाभ देते हुए सरकार ने पुरानी पॉलिसी में संशोधन किया है। पहले प्रति एकड़ जमीन के बदले 1000 गज का रिहायशी और 200 गज का कमर्शियल प्लॉट मिलता था। अब कमर्शियल प्लॉट में 10 गज की बढ़ोतरी करके इसे 210 गज किया गया है।
अगर कोई कारोबारी प्लॉट नहीं लेता है, तो उसे रिहायशी प्लॉट में 30 गज की बढ़ोतरी करके कुल 1630 गज का प्लॉट दिया जाएगा। जहां सिर्फ कमर्शियल प्रोजेक्ट थे, वहां पहले प्रति एकड़ 800 गज जगह मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 840 गज कर दिया गया है। जिस व्यक्ति की 1 एकड़ या उससे अधिक जमीन अधिग्रहित होगी, उसे बिना किसी नीलामी (Auction) के सरकार के रिजर्व प्राइस (आरक्षित मूल्य) पर एक अतिरिक्त प्लॉट लेने का विकल्प भी दिया गया है।
अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए ऐतिहासिक कदम
पंजाब में बिना मंजूरी के बनी अवैध कॉलोनियों के समाधान के लिए कैबिनेट ने बड़ी राहत दी है। अब जिन अवैध कॉलोनियों के भीतर कम से कम 25 फीसदी निर्माण (Construction) हो चुका है, उन्हें सरकार रेगुलर करेगी। संबंधित रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), डेवलपर या मालिक कॉलोनी के क्षेत्र के डीसी रेट (कलेक्टर्स रेट) का 5 फीसदी (रिहायशी क्षेत्र के लिए) और 10 फीसदी (कमर्शियल क्षेत्र के लिए) चार्ज जमा करवाकर अपनी कॉलोनी रेगुलर करवा सकते हैं। सरकार द्वारा पहले प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा और साढ़े चार साल के भीतर कॉलोनी को पूरी तरह विकसित करने के बाद आगे प्लॉटों की खरीद-फरोख्त हो सकेगी।
रजिस्ट्री के लिए NOC की शर्त पूरी तरह खत्म
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को यह होगा कि जो कॉलोनियां इस प्रक्रिया के जरिए रेगुलर होंगी, उनके निवासियों या प्लॉट खरीदारों को अपनी सेल डीड (रजिस्ट्री) करवाने के लिए संबंधित अथॉरिटी से किसी भी तरह का एनओसी (No Objection Certificate) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब कॉलोनी का मुख्य मालिक या डेवलपर सरकार की इस नई प्रक्रिया के तहत पंजीकृत हुआ हो।


Major announcement regarding land and illegal colonies in Punjab; requirement of NOC for property registration








