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DA का इंतजार कर रहे पंजाब के 8 लाख कर्मचारियों को बड़ा झटका, HC में टली अहम सुनवाई; 17 जुलाई को बंद का अल्टीमेटम

चंडीगढ़: लंबे समय से अपने हकों का इंतजार कर रहे पंजाब सरकार के करीब 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया है। महंगाई भत्ते (DA) और पे-कमिशन के बकाया एरियर को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच में गुरुवार को होने वाली बेहद अहम सुनवाई टल गई है। इस सुनवाई पर प्रदेश के लाखों परिवारों की नजरें टिकी हुई थीं और उन्हें किसी बड़ी राहत की आस थी, लेकिन अब उन्हें अदालत के अगले कदम और सरकार के फैसले के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।

30 जून तक भुगतान का था सिंगल बेंच का आदेश

गौरतलब है कि इसी साल 8 अप्रैल को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों के लंबित डीए का भुगतान करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले को डबल बेंच में चुनौती दे दी थी। बड़ी बात यह रही कि डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक तो नहीं लगाई, लेकिन सरकार से सीलबंद लिफाफे में बकाया चुकाने की पूरी योजना (रोडमैप) तलब की थी। बुधवार देर शाम हुई सुनवाई में सरकार ने अपना पक्ष रखा था और अब अदालत को यह देखना था कि सरकार यह पैसा किस्तों में चुकाएगी या फिर खजाने की खस्ता हालत का हवाला देकर और मोहलत मांगेगी।

केंद्र के मुकाबले 18% पीछे हैं राज्य के कर्मचारी

वर्तमान स्थिति की बात करें तो पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को फिलहाल 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। अगर इसकी तुलना केंद्र सरकार के कर्मचारियों से की जाए, तो पंजाब के कर्मचारी अभी भी डीए के मामले में 18 प्रतिशत पीछे चल रहे हैं। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इसी भारी अंतर को पाटने और अपना रुका हुआ पैसा जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों की तरफ से अदालत में पेश हुए वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी पुरजोर हवाला दिया है, जिसमें साफ कहा गया था कि महंगाई भत्ता कोई खैरात या बोनस नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के वेतन का ही एक अभिन्न हिस्सा है।

आर-पार के मूड में कर्मचारी, 17 जुलाई को ‘महाबंद’ का अल्टीमेटम

सुनवाई टलने और लगातार हो रही देरी से नाराज कर्मचारी संगठन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। यूनियनों ने सरकार को खुली चेतावनी दे दी है कि अगर हाईकोर्ट से जल्द कोई ठोस राहत नहीं मिलती है और भुगतान पर स्थिति साफ नहीं की जाती, तो 17 जुलाई को पूरे पंजाब में एक विशाल ‘महारैली’ और ‘महाबंद’ का आयोजन किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि अगर इन 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को भी मिला लिया जाए, तो यह आंकड़ा करीब 40 लाख के पार पहुंच जाता है। ऐसे में अगर यह विशाल वर्ग सड़कों पर उतरता है, तो आने वाले दिनों में इसका सीधा और गहरा असर राज्य के सियासी समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।

Major setback for 8 lakh Punjab employees awaiting DA; crucial High Court hearing adjourned