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जालंधर में दर्दनाक हादसा: शराबी फॉर्च्यूनर चालक ने दादी-पोती को रौंदा, आरोपी को बचाने के लिए पुलिस ने थाने में जड़ा ताला तो मच गया बवाल

जालंधर: जालंधर में शुक्रवार देर रात एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। यहां एक ओवरस्पीड और बेकाबू फॉर्च्यूनर कार ने ई-रिक्शा सवार परिवार को बेरहमी से कुचल दिया। इस भयानक हादसे में दादी और 10 साल की पोती की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस का जो रवैया सामने आया, उसने पीड़ित परिवार के गुस्से को और भड़का दिया। आरोपी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस पर उसे बचाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके चलते आधी रात को थाने के बाहर भारी हंगामा हुआ।

सब्जी खरीद कर लौट रहा था परिवार, तभी पीछे से आई मौत

यह खौफनाक घटना जालंधर के बस्ती पीरदाद रोड पर शेर सिंह कॉलोनी के पास हुई। मृतक बच्ची की बुआ सीमा ने बताया कि उनकी बुजुर्ग मां शीतल शर्मा और 10 साल की भतीजी माही शर्मा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मार्केट से सब्जी खरीद कर घर लौट रहे थे। ई-रिक्शा उनका भाई चला रहा था। तभी पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर ने उनके रिक्शे को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयंकर थी कि दादी और पोती सड़क पर गिर गईं और नशे में धुत कार चालक ने उनके ऊपर से गाड़ी निकाल दी। इस भीषण हादसे में ई-रिक्शा चला रहे भाई का भी चूल्हा टूट गया है और वह गंभीर रूप से घायल है।

रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर, बच्ची को कुचलने के बाद खंभे से टकराई कार

मौके पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, फॉर्च्यूनर चालक इतनी तेज रफ्तार में था और इस कदर नशे में धुत्त था कि उसे कुछ होश ही नहीं था। ई-रिक्शा को टक्कर मारने के बाद भी उसने ब्रेक नहीं लगाई। उसने सड़क पर गिरी 10 साल की मासूम बच्ची की टांगों को बेरहमी से कुचल दिया और फिर तेजी से गाड़ी भगाते हुए एक बिजली के खंभे से जा टकराया। राहगीरों ने बड़ी मशक्कत के बाद नशे में धुत आरोपी को काबू किया और बस्ती बावा खेल पुलिस के हवाले कर दिया। परिजनों का यह भी आरोप है कि भागने की कोशिश में आरोपी ने पीसीआर कर्मी की वर्दी पर भी हाथ डाला था।

 पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

हादसे के बाद असली विवाद तब शुरू हुआ जब पुलिस आरोपी को बस्ती बावा खेल थाने ले गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कार चालक इतना ज्यादा नशे में था कि उससे अपने पैरों पर खड़ा तक नहीं हुआ जा रहा था, लेकिन पुलिस जानबूझकर उसका मेडिकल करवाने में आनाकानी करती रही। हद तो तब हो गई जब परिजन थाने पहुंचे और पुलिस ने मुख्य गेट बंद करके अंदर से ताला जड़ दिया। न्याय की गुहार लगाती पीड़ित मां रो-रो कर थाने का गेट झकझोरती रही, लेकिन अंदर से किसी ने दरवाजा नहीं खोला। पुलिस के इस संवेदनहीन रवैये से भड़के परिजनों ने देर रात 3 बजे तक थाने के बाहर जमकर बवाल काटा।

हंगामे के बाद बैकफुट पर आई पुलिस, रात 3 बजे करवाया मेडिकल

थाने के बाहर बढ़ते तनाव और परिजनों के भारी हंगामे के बाद आखिरकार पुलिस को बाहर आना पड़ा। बस्ती बावा खेल थाने के एसएचओ जयइंद्र ने गेट पर ताला लगाने को लेकर सफाई देते हुए कहा कि ऐसा इसलिए किया गया था ताकि वहां का माहौल खराब न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। लोगों के कड़े विरोध और दबाव के बाद आखिरकार रात 3 बजे के बाद पुलिस ने आरोपी चालक का मेडिकल करवाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे आरोपी के बयान दर्ज कर रहे हैं और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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