
नई दिल्ली: हर घर मालिक अपनी जिंदगी में कभी न कभी इस बड़ी दुविधा का सामना जरूर करता है: क्या होम लोन का बोझ जल्दी चुकाकर खत्म कर देना चाहिए, या उस पैसे को निवेश करके बढ़ने देना चाहिए? वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि इसका कोई एक-सटीक जवाब नहीं है। सही फैसला पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लोन पर ब्याज दर कितनी है, आप कितना जोखिम ले सकते हैं, और आप लंबे समय में अपने पैसे से क्या हासिल करना चाहते हैं।
कब है लोन चुकाने में समझदारी?
अगर आपका होम लोन 9% या उससे अधिक जैसी ऊंची ब्याज दर पर है, तो इसे जल्दी चुकाना एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे होने वाली ब्याज की ‘निश्चित बचत’ (Confirmed Savings) अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट या कम जोखिम वाले निवेश से मिलने वाले रिटर्न से ज्यादा होती है।
इसके अलावा, कर्ज-मुक्त होने से मिलने वाली मानसिक राहत भी एक बड़ा फैक्टर है। घर का पूरी तरह से आपका हो जाना, मासिक किश्तों (EMI) के बोझ से आजादी और वित्तीय स्वतंत्रता का एहसास देता है। यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो रिटायरमेंट के करीब हैं या स्वभाव से कर्ज रखना पसंद नहीं करते।
कब निवेश करना है ज्यादा फायदेमंद?
इसके विपरीत, अगर आपके होम लोन की ब्याज दर कम है (जैसे 7% या उससे कम) और आप थोड़ा-बहुत वित्तीय जोखिम लेने में सहज हैं, तो निवेश करना लंबे समय में ज्यादा लाभ दे सकता है। उदाहरण के लिए, इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में औसतन 10-12% सालाना का रिटर्न दे सकते हैं, जो आपके लोन प्रीपेमेंट से होने वाली 7% की बचत से कहीं ज्यादा है।

यह योजना उन लोगों के लिए सही है जिनकी नियमित आय है, जिन्होंने एक इमरजेंसी फंड बना रखा है, और जोखिम से बचाव के लिए पर्याप्त इंश्योरेंस कवर भी लिया हुआ है।
‘मन की शांति’ बनाम ‘ज्यादा रिटर्न’
सलाहकार कहते हैं कि यह फैसला सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि मानसिक संतोष का भी है। कुछ लोग बिना कर्ज के ही चैन की नींद सो पाते हैं, भले ही उन्हें निवेश पर रिटर्न कम क्यों न मिले। वहीं, कुछ लोग अपने पैसे को निवेश में बढ़ता हुआ देखकर ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। मुख्य बात यह है कि आपको ऐसा विकल्प चुनना चाहिए जो आपको वित्तीय सुरक्षा का अहसास दे, न कि चिंता।
‘बीच का रास्ता’ भी है संभव
जरूरी नहीं कि आप पूरी रकम से सिर्फ एक ही विकल्प चुनें। आप एक ‘हाइब्रिड’ तरीका भी अपना सकते हैं। आप समय-समय पर छोटे-छोटे हिस्सों में प्रीपेमेंट (Partial Prepayment) करके अपने लोन की अवधि (Tenure) कम कर सकते हैं और साथ ही नियमित अंतराल पर अपना निवेश भी जारी रख सकते हैं। इससे लोन का टेन्योर भी कम होगा और आपको लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा भी मिलता रहेगा।
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