चंडीगढ़: पंजाब में बढ़ते अपराध के आंकड़ों के बीच राज्य का मेडिको-लीगल और फॉरेंसिक ढांचा गंभीर संकट से जूझ रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 23 जिलों में से केवल 4 जिलों के सरकारी अस्पतालों में ही नियमित फॉरेंसिक एक्सपर्ट तैनात हैं, जबकि बाकी के 19 जिले पूरी तरह बिना किसी विशेषज्ञ के चल रहे हैं। ऐसे में हत्या, संदिग्ध मौतों और गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में मेडिको-लीगल जांच और पोस्टमार्टम करने की जिम्मेदारी उन सर्जनों और ईएनटी डॉक्टरों के कंधों पर डाल दी गई है, जिनका मूल काम ओपीडी और सर्जरी संभालना है।
केवल 4 जिलों में विशेषज्ञ, 3 जगह मेडिकल छात्र संभाल रहे कमान
नियमों के मुताबिक मेडिको-लीगल केस संभालने वाले प्रत्येक सरकारी अस्पताल में कम से कम एक पूर्णकालिक फॉरेंसिक विशेषज्ञ होना अनिवार्य है। जमीनी हकीकत यह है कि पूरे राज्य में अमृतसर के पास दो, जबकि गुरदासपुर और मोहाली में सिर्फ एक-एक विशेषज्ञ तैनात हैं। एक अन्य विशेषज्ञ खरड़ स्थित केमिकल लैबोरेट्री में पदस्थ है। वहीं दसूहा, बठिंडा और फगवाड़ा में मार्च 2027 तक के लिए तीन मेडिकल छात्रों को अस्थायी तौर पर यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेजों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां राजेंद्र मेडिकल कॉलेज (पटियाला) व गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज (फरीदकोट) में 7-7, अमृतसर मेडिकल कॉलेज में 6 और मोहाली मेडिकल इंस्टीट्यूट में 3 फॉरेंसिक एक्सपर्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
ओपीडी छोड़ शव चीरने को मजबूर सर्जन और नेत्र रोग विशेषज्ञ
जिन 19 जिलों में फॉरेंसिक विशेषज्ञ नहीं हैं, वहां सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, ईएनटी, स्किन, नेत्र रोग और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों को ओपीडी देखने के बाद पोस्टमार्टम करने के लिए भेजा जा रहा है। इस दोहरी ड्यूटी के कारण जहां सामान्य मरीजों का इलाज और नियमित सर्जरी प्रभावित हो रही हैं, वहीं मेडिको-लीगल मामलों में विशेषज्ञता की कमी के चलते जांच रिपोर्ट पर भी असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।
लुधियाना में रोजाना 7 से 10 पोस्टमार्टम, पद सालों से खाली
राज्य के सबसे बड़े औद्योगिक और संवेदनशील जिले लुधियाना की स्थिति सबसे चिंताजनक है। सिविल अस्पताल लुधियाना और सिविल अस्पताल खन्ना में फॉरेंसिक एक्सपर्ट के दो स्वीकृत पद हैं, लेकिन दोनों ही लंबे समय से खाली पड़े हैं। लुधियाना सिविल अस्पताल से डॉ. चरणकमल सिंह का सितंबर 2024 में और खन्ना से डॉ. गुरविंदर कक्कड़ का मई 2025 में तबादला होने के बाद से यहां कोई नई नियुक्ति नहीं हुई। लुधियाना सिविल अस्पताल में रोजाना 30 से 40 मेडिको-लीगल मामले आते हैं और औसतन 7 से 10 पोस्टमार्टम किए जाते हैं।
कागजी कार्रवाई में उलझी प्रक्रिया, रिपोर्ट मिलने में देरी
जटिल मामलों में सिविल अस्पताल प्रशासन को दयानंद मेडिकल कॉलेज (DMCH), क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMCH) और ईएसआईसी अस्पताल से विशेषज्ञ बुलाने पड़ते हैं। यह पूरी प्रक्रिया सिविल सर्जन के जरिए कागजी कार्रवाई में उलझकर रह जाती है, जिससे मेडिको-लीगल और ऑटोप्सी रिपोर्ट तैयार होने में भारी देरी होती है। अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर (SMO) डॉ. अखिल सरीन ने बताया कि शासन को फॉरेंसिक विशेषज्ञ की तत्काल तैनाती के लिए पत्र लिखा जा चुका है और तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत काम चलाया जा रहा है।


Medico-legal system crumbles amidst high crime rate in Punjab; 19 out of 23 districts lack forensic experts




